फिरोजाबाद जिले में सब्जी उत्पादक किसानों पर लॉकडाउन भारी पड़ रहा है। सब्जी मंडी लाएं तो भाव नहीं मिलता। देर हो जाए तो बैरंग लौटकर जाना पड़ता है। इससे किसान औने-पौने दामों पर सब्जी बेचने को मजबूर हैं। कई किसान तो सब्जी फ्री में देने तक को तैयार हैं।
मक्खनपुर के इंदुमई निवासी किसान रामनिवास ने चार बीघा तोरई की फसल बोई थी। पिछले वर्ष सब खर्चा निकाल कर 25 हजार से अधिक का मुनाफा हो गया था। जो तोरई 20 से 25 रुपया प्रति किलोग्राम बिकती थी उस तोरई को 20 रुपये की ढाई किलोग्राम बेचने को मजबूर हैं। रामनिवास कहते हैं कि इस बार फायदा तो दूर बल्कि पैसा निकलना तक मुश्किल है।
पांच से छह रुपये प्रति किलो बिकी गोभी
फतेहाबाद क्षेत्र के विजय मलैहना निवासी किसान सुनील कहते हैं कि पांच बीघा गोभी की फसल की थी। रात रातभर जागकर गोभी मंडी में लेकर पहुंचे, लेकिन कोई खरीददार तक नहीं है। उनका कहना है कि 20 रुपये प्रति किलो बिकने वाली गोभी लॉकडाउन में पांच से छह रुपये प्रति किलो बिक रही है।
शिकोहाबाद के नगला कांस निवासी किसान राजपाल सिंह ने कहा कि तरबूज की गाड़ी मंडी में आते ही बिक्री हो जाती थी। ग्राहक खड़े दिखाई देते थे। बल्कि कई व्यापारी तो खेत से खरीद ले जाते थे। लेकिन इस बार रुपये तो दूर ट्रैक्टर का भाड़ा तक पूरा नहीं हो रहा। विचार आता है कि तरबूजे की फसल का खेत ही जुतवा दूं, क्योंकि कोई लाभ होने वाला नहीं है।
टापा खुर्द निवासी राहुल का कहना है कि मंडी में किसान तड़के चार बजे तक आ जाए उसकी एंट्री होती है। उसके बाद किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता है। किसान तोरई, लौकी लेकर आता है और लौट जाता है। लौकी तो किसान खेत में फेंकने को मजबूर हैं। इस तरह का आलम गांव में दिखाई देता है।
'किसानों को वापस लौटा देता हूं'
नगला पानसहाय निवासी अशोक कुमार कहते हैं कि मंडी में आने वाले सभी किसानों के सामान रखने के बाद उन्हें लौटा देता हूं। ताकि आढ़त पर भीड़ नहीं लगने पाए। किसान मजबूर है क्योंकि पुलिस परेशान करती है, गरीब किसान के पास कोई सुविधा नहीं होती। गोभी, टमाटर, धनियां, मिर्च एवं कद्दू सभी सब्जियां सस्ती हैं।