जैसलमेर के पत्थरों का हुआ प्रयोग
मंदिर को दक्षिण भारतीय मंदिरों की तर्ज पर बनाया गया है। मंदिर निर्माण की कारीगरी में प्रयुक्त हस्त कला और हस्तशिल्प के साथ जैसलमेर की विशेष आभा लिए पीले पत्थर ने मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए हैं। मंदिर दो हजार वर्ग में बना है। मंदिर में दक्षिण भारत के पुजारी हर दिन विधि विधान से पूजा अर्चना करेंगे।
चल रही प्राण प्रतिष्ठा
दक्षिण भारत चैन्नई के कांचीपुरम के विद्वान पंडित शबरी राजन के नेतृत्व में आठ विद्वान पंडितों की टीम ने जहां प्राण प्रतिष्ठा के लिए विशेष पूजन पद्धतियों का शुभारंभ किया, वहीं पंच कुंडीय यज्ञशाला में कांचीपुरम के यज्ञाचार्य भरनीधरन आर ने सुबह वास्तु हवन और शाम की बेला में जया हवन करवाया। इस दौरान दोपहर को शयनादिवासम के अंतर्गत भगवान की प्रतिमा को धान्य की शैया पर एक दिन के लिए शयन कराया गया।