मैनपुरी। दीवानी के अधिवक्ताओं ने बुधवार को जेल चौराहा पर सांकेतिक रूप से जाम लगाया। कार्य बहिष्कार कर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। जिलाधिकारी पर न मिलने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ताओं ने उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथी अधिवक्ता के खिलाफ दर्ज हत्या की रिपोर्ट में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर एसपी को ज्ञापन सौंपा।
बुधवार को मैनपुरी बार एसोसिएशन के अधिवक्ता दीवानी सभागार में एकत्रित हुए। अध्यक्ष अजय कृष्ण पांडेय के नेतृत्व में जुलूस के रूप कलक्ट्रेट के लिए रवाना हुए। जेल चौराहा पर पहुंचकर अधिवक्ताओं ने सांकेतिक रूप से जाम लगाया। कलक्ट्रेट में एसपी अजय कुमार पांडेय को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा है कोतवाली क्षेत्र में हुई एक हत्या में कलक्ट्रेट के वकील एमपी सिंह यादव को झूठा फंसाया गया है। पुलिस ने जांच किए बिना ही वकील को हत्या के मामले में जेल भी भेज दिया है।
इससे जिलेभर के वकीलों में आक्रोश है। ज्ञापन में मांग की गई है हत्याकांड की निष्पक्ष जांच कराई जाए। झूठे फंसाए गए वकील एमपी सिंह यादव को जेल से रिहा कराया जाए। अन्यथा की स्थिति में वकील आंदोलन करने को मजबूर होंगे। सचिव ब्रजेंद्र सिंह यादव, विश्वविमोहन राजपूत, सौरभ यादव, अजीतकांत मिश्रा, अशोक बाजपेयी, दिनेश दीक्षित, बिंदू यादव, रीता नैयर, अनिल कुमार दुबे, सुशील शाक्य, रोहित यादव, विपुल यादव, ब्रजकिशोर त्रिपाठी मौजूद रहे।
डीएम कार्यालय के बाहर की नारेबाजी
अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर नारेबाजी की। अधिवक्ताओं का आरोप था कि डीएम ने उनकी बात नहीं सुनी। अधिवक्ता बिना ज्ञापन दिए ही वापस लौट गए। इसके बाद कलक्ट्रेट सभागार में जिला बार एसोसिएशन और जिला बार एसोसिएशन कलक्ट्रेट की संयुक्त बैठक हुई।
बैठक में कहा गया है कि अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधि मंडल डीएम से मिलने गया था। चैंबर में घुसते ही डीएम ने क्रोधित होते हुए प्रतिनिधि मंडल के साथ अभद्रता का व्यवहार किया। अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से डीएम के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। साथ ही डीएम न्यायालय का अनिश्चितकाल के बहिष्कार का निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को पत्र लिखने का निर्णय लिया।
बार को सहयोग करना चाहिए: डीएम
जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि अधिवक्ताओं का एसपी से मिलने का कार्यक्रम निर्धारित था। इसके बाद वह नारेबाजी करते हुए मेरे कार्यालय में आ गए। यहां जनता दर्शन चल रहा था। अधिवक्ताओं के प्रतिनिधि मंडल को वार्ता के लिए बुलाया गया, लेकिन साथी अधिवक्ता चैंबर में आकर नारेबाजी कर रहे थे। इससे फरियादियों की शिकायत सुनने में परेशानी हुई। अधिवक्ता खुद ही वहां से नारेबाजी करते हुए चले गए। बार को प्रशासन का सहयोग करना चाहिए। उन्हें जनहित में कार्य बहिष्कार नहीं करना चाहिए।
ये है मामला
शहर के मोहल्ला राजीव गांधीनगर में नौ अक्तूबर की सुबह सुुरेंद्र यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अधिवक्ता महेंद्र प्रताप यादव, उनकी पत्नी मधु यादव व सोमेंद्र सिर्फ बिट्टी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने आरोपी अधिवक्ता और उनकी पत्नी को जेल भेजा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि पहले मामले में जांच करनी चाहिए थी। पुलिस ने बिना जांच ही अधिवक्ता को जेल भेज दिया।