खनन माफियाओं की कारस्तानी ने आगरा के 22 परिवारों के चिराग बुझा दिए। महज पांच महीनों के अंदर यमुना और उटंगन नदी में खनन के कारण हुए गड्ढों में फंसकर 22 युवाओं की जान जा चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा उटंगन में 12 और यमुना नदी में 10 की मौत हो चुकी है।
खनन के खेल ने महज पांच माह पहले सिकंदरा में यमुना में रील बनाने गईं छह किशोरियों की जान ले ली थी। यमुना में नहाने गई किशोरियां किनारे पर ही काफी देर तक अठखेलियां कर रही थीं कि अचानक उनका पैर गड्ढे में पड़ा और देखते ही देखते सभी छह सहेलियां मौत के आगोश में पहुंच गईं। इसी तरह उटंगन नदी में दुर्गा मूर्ति विसर्जित करने पहुंचे 12 युवकों को नदी में केवल दो से तीन फुट पानी होने का भ्रम हुआ। बीच धारा में जाने पर अचानक ही खनन के कारण हुए गड्ढे में गिर गए, जिनकी तलाश का काम छह दिन तक चलता रहा।
देश के नामी स्कूबा डाइवर्स, सेना के जवान, एनडीआरएफ के विशेषज्ञों को खनन के गड्ढे में फंसे सभी 12 युवकों को निकालने में मुश्किलें आईं। 25 फीट गहरे और 19 फीट चाैड़े गड्ढे में रेड सैंड स्टोन की कटाई की सिल्ट डाल दी गई थी, जिससे बचाव अभियान में न तो कैमरा काम आया और न ही अन्य उपकरण। कंप्रेसर और सक्शन तकनीक का उपयोग कर खनन के गड्ढे में फंसे युवकों के शव निकाले जा सके।
सेटेलाइट इमेज खोल रही खनन की पोल
उटंगन नदी में जिस जगह हादसा हुआ और 12 युवकों की जान चली गई, वहां पर खनन के कारण गहरा गड्ढा बना हुआ था। इसका खुलासा सेटेलाइट इमेज से हुआ है। हादसे वाली जगह पर बने चेक डैम के दायीं ओर खनन का गहरा गड्ढा है, जिसमें लाल पत्थर की सिल्ट भरी हुई है। इसके नजदीक ही एक और गड्ढा है, जो खनन के कारण बना है। उटंगन नदी में प्रवेश और निकलने के रास्ते के ठीक बीच में यह गड्ढा बना हुआ था। दुर्घटना में बचे विष्णु ने एनडीआरएफ टीम और स्कूबा डाइवर्स को इस गड्ढे का पूरा ब्योरा दिया तो उसके बाद ही पूरा अभियान इसी गड्ढे के आसपास चला, जिस वजह से दो दिन में 6 युवकों के शव टीम ने बाहर निकाल लिए।
पांच माह में हुए हादसे
- 2 अक्तूबर को खेरागढ़ में उटंगन में प्रतिमा विसर्जन के दौरान 12 युवक डूबे
- 3 जून को सिकंदरा में यमुना नदी में रील बना रहीं 6 किशोरियां डूब गईं
- 2 अक्तूबर को करभना में 15 साल का ऋषभ, 14 साल का प्रियांश डूबे।
- 15 सितंबर को पिनाहट में बलाई घाट पर सुखवीर की नदी में डूबने से मौत
- 8 सितंबर को मेहरा नाहरगंज में दो यमुना में गिरे, इनमें से एक की मौत
सांसद राजकुमार चाहर ने बताया कि उटंगन नदी में हुई इस दुर्घटना से सबक सीखने की जरूरत है। नदियों में विसर्जन से लेकर अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी होगी। ऐसी दुर्घटना के समय समन्वय, खनन रोकने जैसे कदमों पर सख्ती से काम करना होगा।