उटंगन नदी की कोख में समाए सात युवाओं का अभी भी कोई पता नहीं चल सका है। हादसे के चार दिन बाद भी सर्च जारी है। वहीं अमर उजाला की टीम जब गांव में पहुंची, तो दृश्य हृदयविदारक दिखाई दिया।
गजेंद्र के पिता रेवती प्रसाद बहुत दुखी हैं। उनका कहना है कि तीसरे दिन भी बेटे का पता नहीं चला है। अगर बेटे का शव मिल जाता तो उसका अंतिम संस्कार कर लेते। रेवती प्रसाद मजदूरी करके तीन बेटों जयप्रकाश, यशपाल और गजेंद्र का पालन-पोषण करते हैं। गजेंद्र 12वीं कक्षा का छात्र था। उन्होंने सरकार से आर्थिक मदद की अपील की है।
विज्ञापन
विलाप करती महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुखबीर की तीसरे दिन भी तलाश जारी
पिढ़ोरा क्षेत्र के गांव राटोटी निवासी सुखबीर पुत्र जंडेल सिंह बृहस्पतिवार को बालाई घाट पुल से मूर्ति विसर्जन करते समय पैर फिसलने से यमुना नदी में डूब गया था। चीख-पुकार मचने के बाद मौके पर पुलिस पहुंची थी। शुक्रवार को एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू शुरू किया, जो शनिवार को भी जारी रहा, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल सकी। परिजन लगातार मौके पर मौजूद हैं और बदहवासी की हालत में रोते-बिलखते नजर आ रहे हैं। शनिवार को उपजिलाधिकारी ने मौके का निरीक्षण कर परिजनों को सांत्वना दी।
घर बैठा पिता
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेटा बंटाता था खेतों में हाथ
उटंगन नदी में लापता करन के पिता रनवीर अपने बेटे के लिए बेहद चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि करन मेहनती था और हमेशा खेती-बाड़ी में हाथ बंटाता था। उसकी मां व अन्य परिजन बेसब्री से उसके लौटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
बेसुध हुई महिला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तीन दिन से नदी किनारे बदहवास परिजन
उटंगन नदी किनारे परिजन की भीड़ लगातार बनी हुई है। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग सभी अपनों के इंतजार में माैजूद हैं। लापता दीपक की भाभी सीमा ने बताया कि मूर्ति विसर्जन के लिए निकले थे, तब से कोई खबर नहीं। खाने-पीने की सुध नहीं रही। अब नहीं पता कब पार्थिव शरीर मिलेगा।
बहन का आरोप- नेता का बेटा होता तो खोज लिया होता
लापता वीनेश की बहन सर्वेश ने कहा कि तीसरा दिन है लेकिन अब तक भाई का कुछ पता नहीं चला है। वह घर का लाडला था और पिता के कामों में मदद करता था। अब घर कैसे चलेगा, उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई प्रभावशाली व्यक्ति का बेटा होता, तो अब तक पूरी ताकत झोंक दी जाती।