आगरा नगर निगम कार्यकारिणी की मंगलवार को बैठक हुई। मेयर हेमलता दिवाकर की अध्यक्षता में हुई बैठक में पार्षद रवि बिहारी माथुर ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में वसूले जा रहे यूजर चार्ज में संशोधन का प्रस्ताव रखा। तय हुआ कि सदन में सभी 100 पार्षदों के साथ चर्चा के बाद यूजर चार्ज में संशोधन किया जाएगा। सदन ही नई दरें तय की जाएंगी। इस बैठक में कार्यकारिणी के 6 पार्षदों को विदाई दी गई।
पार्षद रवि माथुर ने एसएसवाई वेस्ट कंपनी को दिए ठेके पर सवाल उठाते हुए यूजर चार्ज की दरों को संशोधित करने के प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि यूजर चार्ज की दरों से गरीब और छोटे कारोबारियों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है। लोग पार्षदों के सामने इसका विरोध कर रहे हैं। इस प्रस्ताव पर लंबी बहस हुई। तय हुआ कि सदन में चर्चा की जाए। तब तक यूजर चार्ज की वसूली रोक दी जाए। रवि माथुर ने सफाई कर्मचारियों के गैंग की संख्या मांगी और गृहकर के अस्सिमेंट से छूटे बहुमंजिला भवनों, आवासीय कॉलोनियों से की गई वसूली का प्रस्ताव रखा, जिसे पारित कर दिया गया।
उपसभापति हेमलता चौहान ने पार्षदों को ट्री गार्ड के साथ पौधे उपलब्ध कराने की मांग की। पार्षद बद्री प्रसाद माहौर के झलकारी बाई शोभायात्रा के लिए अनुदान एक लाख करने का प्रस्ताव को मंजूर कर दिया गया। बैठक में नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल, अपर नगर आयुक्त शिशिर कुमार, सत्येंद्र कुमार तिवारी आदि मौजूद रहे।
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क्या काम किया हमने, जो माला पहना रहे
कार्यकारिणी के सदस्य रवि बिहारी माथुर ने विदाई के समय माला पहनने से इन्कार कर दिया। भाजपा पार्षद रवि बिहारी माथुर ने सवाल उठाया कि दो साल में शहर की जनता को कार्यकारिणी के जरिए ऐसा क्या दिया जा सका, जिसके लिए माला पहनाई जाए। उन्होंने कहा कि दो साल में एक भी सदन और कार्यकारिणी नगर निगम अधिनियम के तहत नहीं कराई गई। हर बार मनमानी की गई। ऐसे में सम्मान की क्या जरूरत है। जब पार्षदों के प्रस्ताव पर चर्चा ही नहीं हुई, जो प्रस्ताव पारित हुए, उनका अनुपालन नहीं हुआ तो सम्मान के तौर पर माला क्यों पहनें।
24 की जगह 4 बैठकें, कहां उठा सके मुद्दे
कार्यकारिणी की बैठक शुरू होते ही पार्षद रवि बिहारी माथुर ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि एक बार एजेंडा जारी होने के बाद उसे बदला नहीं जा सकता। नगर निगम एक्ट 1959 के तहत हर दो माह में एक बार सदन का अधिवेशन और दो कार्यकारिणी होनी चाहिए। दो साल में 24 में से केवल चार कार्यकारिणी बैठकें हो पाईं, जबकि सिर्फ 3 सदन किए गए। सदन और कार्यकारिणी का प्रावधान इसलिए है कि पार्षद अनियमितताओं को उठाएं और अधिकारियों को आइना दिखाएं, लेकिन बैठकें नहीं होने से उनकी आवाज दबाई जा रही है। पार्षद बंटी माहौर ने भी सदन और कार्यकारिणी न होने पर हंगामा किया और मेयर से सीधे सवाल पूछे।
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कार्यकारिणी के इन सदस्यों को दी गई विदाई
- हेमलता चौहान, उपसभापति
- रवि बिहारी माथुर, पार्षद
- बद्री प्रसाद माहौर, पार्षद
- बनवारी लाल, पार्षद
- हरिओम गोयल, पार्षद
- गजेंद्र पिप्पल, पार्षद
जहां से समाधान, वही गिर पड़ी छत
पूरे शहर की कचरा, पानी, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पार्क, सीवर, गृहकर आदि की समस्याओं का निदान जिस नगर निगम के कार्यकारिणी कक्ष से होता है, उसकी छत एक बार फिर से गिर पड़ी। नगर निगम कार्यकारिणी की मंगलवार को सुबह 11 बजे से बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन उससे एक घंटे पहले ही सुबह 10 बजे कार्यकारिणी कक्ष की फॉल्स सीलिंग भरभराकर गिर पड़ी। इस वजह से यह बैठक सदन कक्ष में हुई। कार्यकारिणी कक्ष में लिंटर का प्लास्टर गिरने के कारण यह नीचे आ गई। छत पर गली हुई सरिया और ईंटे साफ नजर आने लगीं। एक साल पहले भी कार्यकारिणी कक्ष की छत और फॉल्स सीलिंग गिर चुकी है। तीन साल पहले ही इसकी मरम्मत और सौंदर्यीकरण के काम पर 22 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए गए थे।