पोरबंदर में 26/11 को दोहराने की आतंकी साजिश के बाद भी ताजमहल की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने सबक नहीं लिया। तभी तो जिस ओर से ज्यादा खतरा है वहीं सुरक्षा उपकरण, संसाधन बेकार पड़े हैं। यमुना किनारे दोनों मोटर बोट खराब हैं तो वॉच टावर गिर पड़े हैं। यहां जवान कभी तैनात ही नहीं हुए। महताब बाग की ओर फेंसिंग भी टूटी हुई है, जबकि बैरियर पर लगाए गए डीएफएमडी से सुरक्षा जांच कभी हुई ही नहीं।
मुंबई पर 26/11 हमले के बाद आतंकी हेडली ने कई खुलासे ताजमहल को लेकर किए थे। हाल में ही यमुना एक्सप्रेस वे और होटलों को निशाना बनाए जाने के अलर्ट भी खुफिया एजेंसियों ने जारी किए। नोएडा में आतंकियों की गिरफ्तारी और पोरबंदर में हुई घटना के बाद भी शनिवार को ताजमहल की सुरक्षा में ढील रही। हां, यलो जोन में जरूर पुलिस ने डॉग स्क्वायड के साथ चेकिंग की। यलो जोन के सबसे खतरनाक प्वाइंट यमुना किनारे पर छह बुलेटप्रूफ वाच टावरों पर राउंड द क्लॉक डयूटी रहनी थी, लेकिन दो साल पहले आई बाढ़ में तीन वॉच टावर गिर गए। इनको दोबारा ठीक नहीं किया गया। कभी जवान तैनात भी हुए तो न हथियार मिले और न लाइटें। दशहरा घाट पर पेट्रोलिंग के लिए पुलिस के पास दो मोटरबोट हैं, लेकिन कुछ महीनों तक वीआईपी मेहमानों को घुमाने के बाद से खराब पड़ी हैं। अब यह कुंए से बंधी हैं।
जवानों को वाच टावर पर चाहिए
- आटोमेटिक हथियार
- ड्रेगन लाइट
- नाइट विजन डिवाइस
- वॉकी-टॅाकी हैंडसेट
- बुलेटप्रूफ जैकेट
सेंट्रल कंट्रोल रूम ही नहीं
ताजमहल पर रेड जोन की सुरक्षा सीआईएसएफ के पास है तो यलो जोन की पुलिस और पीएसी के पास। इन तीनों के बीच आपसी सामंजस्य और सूचना के लिए कोई निगरानी यंत्र नहीं है। महीने में एक बार मॉक ड्रिल होती है, लेकिन हर दिन संचार के लिए कोई नेटवर्क नहीं बनाया गया। एनएसजी ने ताजमहल की सुरक्षा केलिए सीआईएसएफ और पुलिस के संयुक्त कंट्रोल रूम की सिफारिश की थी, अब तक यह बन नहीं पाया, जबकि दोनों ही एजेंसियां अलग-अलग अपने-अपने जोन में सीसीटीवी कैमरों से निगाह रखती हैं।