अपहृत बालक लक्ष्मण ने बताया कि बाइक सवारों ने उसे बर्गर में नशे की गोली मिलाकर खाने को दी थी। न खाने पर गोली मारने की धमकी भी दी। उसके बाद उसे वह कहां ले गए, यह उसे नहीं पता। सवेरे नशा उतरा तो उसने खुद को कोठरी में बंद पाया। दरवाजा खटखटाया, पर किसी ने उसकी आवाज नहीं सुनी। बाद में पुलिस ने दरवाजा के ताला तोड़कर निकाला।
तीन भाइयों में सबसे छोटा है लक्ष्मण
अपहृत बालक के मुक्त होने पर पिता राजकुमार और चाचा काफी खुश नजर आ रहे हैं। बार-बार दोनों भाई पुलिस का शुक्रिया अदा कर रहे थे। लक्ष्मण के पिता कोसीकलां बस अड्डे पर जनरल स्टोर की दुकान चलाते हैं। लक्ष्मण तीन भाइयों में सबसे छोटा है। उससे बड़े जीतू और नितिन है।
एसपी देहात आदित्य शुक्ला ने बताया कि अपहरण के पीछे क्या मकसद था। इसका खुलासा अपहरणकर्ताओं के पकड़े जाने पर ही हो सकेगा। बालक लक्ष्मण के परिजन रंजिश से साफ इंकार कर रहे हैं। इसके अलावा चर्चा है कि तीन महीने पहले लक्ष्मण के चाचा मनोज ने 15 लाख रुपये की दुकान बेची थी और एक दुकान 20 लाख रुपये में लेने की बात भी चल रही थी। एसपी देहात फिरौती से इंकार नहीं कर रहे हैं।