उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक किलों, महलों और धरोहरों को अब राजस्थान की तर्ज पर विवाह और पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा। सोमवार को ताज पूर्वी गेट स्थित होटल ताज में आयोजित इंडियन वेडिंग इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव एंड एक्सपो-2026 में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने यह घोषणा की।
मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने दो दिवसीय कॉन्क्लेव का फीता काटकर उद्घाटन किया। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि नई पर्यटन नीति, बेहतर सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते यूपी में डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए बेहतर माहौल बना है। उन्होंने 50 से अधिक स्टॉलों का अवलोकन कर उद्यमियों से सीधा संवाद किया।
बताया कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने से क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं बढ़ी हैं। आधिकारिक नीति के अनुसार 10 लाख से 10 करोड़ रुपये तक के पात्र निवेश पर 25 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी दी जा रही है। महिला व एससी/एसटी उद्यमियों के लिए पांच प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान है।
वेडिंग इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मनीष अग्रवाल रावी ने सरकार और इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों को मिलाकर 10 सदस्यीय समिति गठित करने की मांग रखी, ताकि नीतिगत समस्याओं का समय पर समाधान हो सके। कॉन्क्लेव के पहले दिन प्यार के शहर से शादी के शहर तक, ए स्वीट अफेयर और डिजिटल मार्केटिंग जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
श्याम बाबू गर्ग को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
कॉन्क्लेव में कुंजामल एसोसिएट्स के 78 वर्षीय श्याम बाबू गर्ग को व्यावसायिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2026 से नवाजा गया। 115 वर्षों की व्यावसायिक विरासत को सहेजने के लिए उन्हें यह सम्मान मिला। इसके साथ ही उत्कृष्ट सेवा देने वाली 20 प्रमुख व्यावसायिक इकाइयों को ऑल इंडिया आइकन अवॉर्ड प्रदान किया गया।
बदला शादियों से लेकर दावतों का स्वरूप
एसोसिएशन के महासचिव संदीप उपाध्याय के अनुसार अब शादियों का स्वरूप केवल फूलों और पारंपरिक मिष्ठानों तक सीमित नहीं रहा है। अब 100 से अधिक मिठाइयों की वैरायटी के साथ आकर्षक पैकेजिंग, थीम आधारित लाइटिंग और डिजिटल मार्केटिंग का जोर है। सोशल मीडिया और एआई का प्रयोग केवल प्रचार नहीं, बल्कि सीधे बिजनेस लीड जुटाने का मुख्य जरिया बन चुका है। शादियों से लेकर दावतों तक का स्वरूप बदल रहा है।
संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का जरिया
विशेष सत्र में अभिनेत्री गीतिका गंजूधर ने कहा कि भारतीय शादियां संस्कारों व संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। आयोजकों को वेडिंग इवेंट्स में स्थानीय लोक कलाकारों, शास्त्रीय संगीत और पारंपरिक कला को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे हमारी पारंपरिक धरोहर को नया जीवन मिलेगा और स्थानीय कलाकारों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।