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Success Story: शहर की शिक्षा नहीं थी आसान, मां की जिद ने दिव्या को बनाया डिप्टी कलेक्टर, किया UP-PCS टॉप

Sat, 08 Apr 2023 09:30 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

UPPSC PCS Topper: दिव्या सिकरवार सेंट जोंस कॉलेज की छात्रा हैं। उन्होंने बताया कि तीसरी बार में उन्हें मंजिल मिल सकी। वे अपनी सफलता का सबसे अधिक श्रेय मां को देती हैं। उनका कहना है कि मां की जिद थी जिसकी वजह से वे डिप्टी कलेक्टर बन सकीं। 
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दिव्या सिकरवार बनीं टॉपर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किसी चीज को हासिल करने का जज्बा मन में हो, तो भगवान भी साथ देता है। दिव्या को परिवार का साथ मिला लेकिन सबसे अधिक मां की भूमिका रही। पांचवीं पास सरोज देवी को अपनी बेटी को कुछ बनाने की जिद थी। बेटी ने भी मां के भरोसे को ठेस नहीं पहुंचाई। प्रदेश में टॉपर बनकर नाम रोशन किया।

नहीं हारी हिम्मत 

गढ़ी राम एत्मादपुर की निवासी दिव्या सिकरवार बताती है कि पहली बार में मैंस क्लीयर नहीं कर सकी, तो दूसरी बार में दो नंबर से सलेक्शन रह गया। इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी। प्रदेश में टॉपर होने का विश्वास नहीं हो रहा है। गांव से शहर तक किसी लड़की का शिक्षा हासिल करना आसन नहीं होता है। दो बार सफलता न मिलने पर कोई दूसरी नौकरी करने की सोच रही थी लेकिन मां ने पीछे हटने से मना कर दिया। 

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फिर शुरू की यूपीपीसीएस की तैयारी 

दिव्या ने सेंट जोंस डिग्री कॉलेज से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा हासिल की। उसके बाद यूपीपीसीएस की तैयारी शुरू की थी। ऑनलाइन परीक्षा की तैयारी की। परिवार में पिता राजपाल फौजी,दादी और दो छोटे भाई है। डिप्टी कलेक्टर बनने पर सरकार की योजनाओं का लाभ हर लाभकारी तक पहुंचाने का प्रयास करेंगी। गांव की बेटी के डिप्टी कलेक्टर बनने पर हर कोई बधाई दे रहा है। पिता राजपाल भी बेटी की सफलता पर मिष्ठान का वितरण करने में लगे रहे।

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एश्वर्या दुबे अपने परिवार के साथ - फोटो : अमर उजाला

ऐश्वर्या दुबे ने पाया नौंवा स्थान

 यूपीपीसीएस में नौवां रैंक हासिल करने वाली मधु नगर की ऐश्वर्या दुबे ने कहा कि एनसीईआरटी की पुस्तकों से तैयारी में मदद मिली। सिविल सर्विसेज में जाना मेरा मकसद है, इसकी तैयारी कर रही हूं। यूपी पीसीएस में नौवां रैंक मिलने पर अभी एसडीएम के पद पर चयन हुआ है। पढ़ाई के लिए कम से कम आठ घंटे जरूर दें। जब तैयारी करें तो सोशल मीडिया पर समय बर्बाद न करें। पढ़ाई के लिए अपना लक्ष्य तय कर उसे पाने में जुट जाएं। इनके पिता हरेंद्र दुबे और मां रचना दुबे का कहना है कि बेटियों को मौका मिले तो वह भी मुकाम पा सकती हैं।
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