त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण का निर्धारण दोबारा होगा। सोमवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद यह निर्णय हुआ है। सन 1995 को आधार वर्ष मानते हुए जारी किए आरक्षण को निरस्त कर दिया है। अब सन 2015 के आधार वर्ष के चक्रानुक्रम में अब नए सिरे से आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। ऐसे में पंचायत चुनाव पर क्या असर पड़ेगा, इसे लेकर कयास शुरू हो गए हैं। आगरा जिले में प्रशासन को दोबारा आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में 20 से 25 दिन का समय लग सकता है।
जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह ने न्यायालय के आदेश की पुष्टि करते हुए कहा कि शाम तक जिले में पुनः आरक्षण कार्यक्रम की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। कोर्ट ने वर्ष 1995 की जगह आरक्षण निर्धारण के लिए 2015 को आधार वर्ष माना है। इस निर्णय के बाद जिले में 690 ग्राम प्रधान, 1080 ग्राम पंचायत सदस्य, 1200 क्षेत्र व 51 पंचायत सदस्यों के वार्ड नए सिरे से आरक्षित किए जाएंगे।
बता दें यूपी पंचायत चुनाव में सीटों पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपना फैसला सुना दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए सीटों के आवंटन पर आरक्षण लागू किया जाए। यह प्रक्रिया 25 मार्च तक पूरी करने के लिए कहा गया है। ऐसे में आगरा जिला प्रशासन के सामने समय पर प्रक्रिया पूरी करना चुनौती से कम नहीं होगा।
जिला प्रशासन ने 2 मार्च को 690 ग्राम प्रधान, 1080 ग्राम पंचायत सदस्य, 1240 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 51 ग्राम पंचायत सदस्यों का आरक्षण जारी किया था। आरक्षण के विरोध में 519 शिकायतें व आपत्तियां प्राप्त हुईं थी। डीएम की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम ने इनका निस्तारण किया, लेकिन अब दोबारा आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। ऐसे में यह कयास लगने लगे हैं कि क्या यूपी पंचायत चुनावों में देरी हो सकती है।
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