देश में आजादी के कुछ समय बाद ही भारी अकाल पड़ा था। लोग घास खाने पर मजबूर हो गए थे। बिहार में तो ऐसे हालात हो गए थे कि माताएं अपने बच्चों को मिट्टी खिलाने पर विवश हो गईं। लोग भूख से छटपटाने लगे।
ऐसे हालात के बीच नेहरू सरकार पहला आम चुनाव कुछ समय के लिए टालने को तैयार हो गई थी। इस संबंध में कई राज्यों की राय थी कि चुनाव आगे बढ़ा दिए जाएं। बाद में खाद्यान्न की स्थिति में सुधार होने के कारण चुनाव समय पर ही हुए।
अमर उजाला में 4 मई 1951 में प्रकाशित खबर के अनुसार, अकाल के कारण नेहरू मंत्रिमंडल ने आम चुनाव एक वर्ष के लिए टालने का फैसला किया है। खाद्यान्न समस्या के चलते कई राज्यों की सरकारों ने नेहरू को पत्र लिखा था कि नवंबर-दिसंबर का वक्त उपयुक्त नहीं है।
आम चुनाव आगे बढ़ा दिए जाएं। मद्रास विधान परिषद ने भी आम चुनाव टालने का प्रस्ताव पारित किया था। तत्कालीन कानून मंत्री डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर ने संसद में कहा था कि मद्रास के प्रस्ताव में कोई ठोस सुझाव नहीं है। चुनाव नवंबर-दिसंबर में कराए जा सकते हैं, बाद में जवाहर लाल नेहरू भी इसके लिए तैयार हो गए।