योगी सरकार के बजट में अरबी फारसी मदरसों के आधुनिकीकरण, अनुदानित और गैर अनुदानित मदरसों की दशा सुधारने को 400 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया है।
मदरसा संचालकों और मुस्लिमों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि सरकार सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांत पर काम करती प्रतीत हो रही ह्रै।
आल इंडिया दीनी मदारिस बोर्ड के प्रदेश सचिव व मदरसा संचालक मोहम्मद उजैर आलम ने कहा कि सरकार ने अल्पसंख्यकों का बजट में पूरा ख्याल किया है। सबसे बड़ी बात है कि मदरसों को लेकर बयानबाजी नहीं की है बल्कि इस पर अमल भी करने का प्रयास किया है।
यही कारण है कि मदरसों की दशा सुधारने के लिए चार सौ करोड़ रुपये से अधिक का भारी भरकम बजट दिया है। इसमें मदरसों के आधुनिकीकरण को नई दिशा मिलेगी। सरकार का ये कदम वास्तव में सराहनीय है।
मदरसा अफजल उल उलूम के शिक्षक मुफ्ती अमीरउद्दीन का कहना है कि मदरसों के लिए प्रदेश सरकार ने बेहतरीन कदम उठाए हैं। अब यकीन होने लगा है कि सरकार मदरसों के प्रति गंभीर है।
सरकार को अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति में भी इजाफा करना चाहिए था। इसके लिए अलग से बजट देना चाहिए था। लेकिन जहां तक मदरसों के लिए दी गई धनराशि का सवाल है तो इसका सदुपयोग हो तो तस्वीर बदलेगी।
इमारतें जर्जर हो चुकी हैं
सगीर फातिमा गर्ल्स इंटर कॉलेज के प्रबंधक जमीलउद्दीन कुरैशी ने कहा कि प्रदेश सरकार को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को भी अलग से बजट देना चाहिए था। अल्पसंख्यक संस्थानों की इमारतें जर्जर हो चुकी हैं।
पेयजल, फर्नीचर और साफ सफाई तक के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं है, क्योंकि इनकी नियुक्ति पर प्रदेश सरकार ने रोक लगा रखी है। ऐसे में मदरसों के विकास के लिए बजट का आवंटन किया गया है।
अल्पसंख्यकों के बजट में कुछ कटौती भी की गई है। नीयत साफ हो तो मदरसों की दशा भी सुधर सकेगी। अगर सरकार अपनी नीतियां नहीं थोपे तो ये कदम बेहतर भी हो सकता है।