आगरा के सुशील नगर में दोहरे हत्याकांड में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हत्याकांड के बाद पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए थे। दो डंडे और बांका से पूजा और शिवम को मारा गया था। पुलिस को यह मिल गए थे। घटनास्थल पर लगे एक कैमरे में पूरी घटना कैद हो गई थी। इसके साथ ही आरोपियों के कपड़ों और घटनास्थल पर खून मिला था। इसके नमूने लेकर विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे गए थे।
पहले मौसेरे भाई शिवम, फिर पत्नी पूजा की हत्या करने वाला गौरव सिंह यूट्यूब पर अपना चैनल चलाता था। कभी भाई, कभी बच्चों तो कभी पत्नी के साथ शॉर्ट वीडियो बनाकर लोगों को संदेश देता था। भाई शिवम की वजह से रिश्ते में आई दरार पर अपने इरादे भी उसने कुछ वीडियो में अपलोड कर जाहिर किए थे। एक वीडियो में कहा था कि पंछी अगर किसी दूसरे दाने का आदी हो जाए तो उसे आजाद कर देना चाहिए।
गौरव सिंह ने लाइफ मोमेंट के नाम से बने चैनल में 277 वीडियो अपलोड किए थे। उसके तब 685 सब्सक्राइबर्स और हजारों में व्यूअर थे। केस की तत्कालीन विवेचक डाॅ. सुकन्या शर्मा ने बताया कि शिवम को जिस जगह पर मारा गया था, वहां कैमरा था। इसके फुटेज पुलिस को मिल गए थे। बांका और डंडों पर खून लगा था। इन्हें जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया था। जिन लोगों ने हत्याकांड किया, उनके कपड़ों पर भी खून था। इसका मिलान वैज्ञानिकों ने किया। इसमें साबित हुआ कि यह खून मृतकों का ही है।
मदन और पत्नी को मिल गई थी जमानत
मदन को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। उसकी पत्नी पहले ही जमानत पर रिहा हो गई थी। गाैरव और उसका भाई अभिषेक जेल में ही थे। मामले में पुलिस ने प्रभावी पैरवी की थी।
शक की वजह से की थी दोनों की हत्या
अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर पाया कि महिला और उसके मौसेरे देवर की पिता-पुत्रों ने शक की वजह से हत्या की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पूजा के शरीर पर 9 कटे हुए घाव, एक खुरचन और चेहरे के बाईं तरफ सूजन की पुष्टि हुई थी।
शिवम के शरीर पर 6 कटे हुए घाव, दाहिने कंधे, पेट और सीने पर सूजन थी जो धारदार हथियार और डंडे से ही लग सकती थीं। मृतका की मां ने अदालत में बताया कि उन्होंने अपनी पुत्री पूजा से शिवम से अवैध संबंधों के बारे में पूछा था तो उसने मना कर दिया था। मृतक के भाई अभिषेक ने भी संबंध होने से मना किया था। इसके बाद भी आरोपी शक करते थे। हालांकि अवैध संबंधों का कोई साक्ष्य नहीं मिला था।
कॉल डिटेल न होने से नीलम बरी
मृतका की सास पर भी हत्या में शामिल, षड्यंत्र व अन्य आरोप थे। मगर विवेचक ने मृतक शिवम और नीलम की कॉल डिटेल नहीं निकाली और न ही कोई साक्ष्य पत्रावली पर प्रस्तुत किया। घटना का जो वीडियो सामने आया उसमें भी नीलम नहीं दिखाई दे रही थीं। अदालत ने उसे बरी कर दिया।
फफक पड़े दोषियों के परिजन, लोगों ने संभाला
कोर्ट रूम में सजा से पहले मदन, गौरव और अभिषेक को भी लाया गया था। मदन की पत्नी नीलम और सबसे छोटा बेटा कृष्णा भी आए थे। फैसला सुनते ही तीनों दोषी कठघरे में फर्श पर बैठ गए। जैसे ही आदेश की पत्रावली पर हस्ताक्षर के लिए बुलाया गया, तो कोर्ट रूम में मौजूद गौरव का भाई कृष्णा रोने लगा। वह गौरव से लिपट गया। गौरव ने उससे कहा कि परेशान न हो। हमें न्याय पर भरोसा है। मां नीलम भी फूट-फूटकर रोने लगे। उन्हें लोगों ने किसी तरह संभाला।
अभिषेक की गवाही और वीडियो सजा दिलाने में रहे अहम
दोषियों को सजा दिलाने के लिए अभियोजन पक्ष ने मृतका की मां और डॉक्टर सहित 14 गवाह अदालत में पेश किए। घटना के चश्मदीद गवाह मृतक शिवम के भाई अभिषेक की गवाही और घटना का सीसीटीवी फुटेज दोषियों को सजा दिलाने में अहम रहा।
अभिषेक ने बयान में कहा था कि 27 मई, 2022 को किसी का फोन आने पर भाई स्कूटर लेकर घर से निकला था। मां ने भाई को देखकर आने के लिए पीछे से उन्हें भेजा। वह भाई के पीछे-पीछे गया तो देखा कि आरोपियों के मकान से 5-6 मकान पहले भाई घर की गली से मंदिर के पास आकर गिरा। मौसा मदन, मौसेरे भाई गौरव और अभिषेक भाई को लाठी, डंडे और धारदार हथियार से मार रहे थे। आरोपियों के जाने के बाद वह भाई के शव के पास पहुंचे। देखा पास में भाभी पूजा की लाश भी घर के बाहर पड़ी थी। पूजा की हत्या करते हुए हुए उन्होंने किसी को नहीं देखा।
अदालत के आदेश पर सीसीटीवी फुटेज देखा गया। दो वीडियो थे। पहला 46 सेकंड का था। जिसमें एक युवक स्कूटर से गली के अंदर जाता दिखा था। दूसरा वीडियो 1:40 सेकंड का था। उसमें एक युवक को तीन लोग मिलकर मार रहे थे।
चेहरे पर शिकन नहीं, टीशर्ट पर लिखा था एवरी थिंग इज कूल
जिस तरह से गौरव, उसके भाई अभिषेक और मदन ने दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था। घटना के बाद तीनों थाने भी पहुंच गए थे। उसी तरह से सजा मिलने के बाद दोषियों के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। पिता मदन की टीशर्ट पर लिखा था, एवरी थिंग इज कूल...। दीवानी परिसर में फैसले के बाद जब तीनों को बाहर लाया गया तो लोगों की भीड़ लग गई। लोग समझ रहे थे कि तीनों को किसी तरह का अफसोस होगा। मगर चेहरे पर कहीं भी परेशानी का भाव नजर नहीं आया। वह आराम से पुलिस के साथ बाहर आए। पुलिस उन्हें गाड़ी में जिला जेल लेकर चली गई।
हत्या के दोषी पति-देवर व ससुर को फांसी की सजा
आगरा के एत्माद्दौला थाना इलाके के सुशील नगर में पूजा (28) और उसके मौसेरे देवर शिवम (21) की हत्या के मामले में कोर्ट ने बुधवार को तीन लोगों को फांसी की सजा सुनाई है। तीन साल 10 महीने 4 दिन पहले हुई इस वारदात में मृतका का पति गौरव, देवर अभिषेक और ससुर मदन दोषी निकले। अपर जिला जज-26 अमरजीत ने तीनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं, मृतका की सास को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
यह घटना 27 मई, 2022 को हुई थी। इरादतनगर थाना क्षेत्र के गांव डुंडीपुरा निवासी पूजा की शादी घटना से 6 साल पहले एत्माद्दौला थाना क्षेत्र के ब्रह्मपुरी निवासी गौरव के साथ हुई थी। पूजा की मां इंद्रा देवी ने एत्माद्दौला थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि बेटी की शादी में हैसियत के अनुसार दान-दहेज दिया गया था लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही पति गौरव, ससुर मदन, सास नीलम, देवर अभिषेक, देवरानी काव्या अतिरिक्त दहेज में कार और पांच लाख रुपये की मांग करने लगे।
मांग पूरी न होने पर बेटी का उत्पीड़न करते थे। समाज के लोगों ने भी कई बार पंचायत में समझाया लेकिन ससुराल वाले नहीं माने। 10 अप्रैल, 2022 को थाने में शिकायत भी की थी। उस दौरान बेटी के ससुराल वाले राजीनामा कर उसे अपने साथ ले गए। बेटी का मौसेरा देवर शिवम उसकी मदद करता था। ससुराल में होने वाली हर घटना के बारे में उन्हें बताता था। घटना वाले दिन बेटी की ससुराल वालों ने षड्यंत्र कर शिवम को घर बुलाया।
लाठी-डंडे और लोहे के बांके से हमला कर बेटी पूजा और शिवम की हत्या कर दी। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था। विवेचक ने मदन, गौरव, अभिषेक और नीलम के खिलाफ 23 अगस्त, 2022 को आरोपपत्र दाखिल किया। देवरानी काव्या और देवर कृष्णा की प्राथमिकी में गलत नामजदगी पाए जाने पर उनके नाम निकाल दिए।
तब तक लटकाएं...जब तक मृत्यु न हो जाए
मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 14 गवाह पेश किए गए। इनमें चश्मदीद गवाह मृतक शिवम के भाई अभिषेक की गवाही और घटना का सीसीटीवी फुटेज दोषियों को सजा दिलाने में अहम रहा। अदालत ने गौरव, अभिषेक और मदन को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि दोषियों को तब तक गर्दन के सहारे फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। फैसले के बाद तीनों दोषियों को कोर्ट से जेल भेज दिया गया।