‘द होम आफ ताज’, उत्तर प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और आधुनिक यूपी का संगम नजर आया प्रवासी सम्मेलन की प्रदर्शनी में, जिसमें मुगलिया सल्तनत से लेकर गदर तक में सूबे का योगदान और उसके बाद शिल्प, कला और संस्कृति के साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर में प्रदेश के विकास की झलक दिखाई गई। 60 से ज्यादा स्टॉल वाली प्रदर्शनी का मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सांसद और पत्नी डिंपल यादव के साथ उद्घाटन किया। उन्होंने मार्बल इनले वर्क से लेकर चिकन और पीतल पर नक्काशी पर शिल्पियों से बात भी की।
24 जनवरी को मिला था उत्तर प्रदेश का नाम
यूनाइटेड प्राविंस से उत्तर प्रदेश के रूप में सूबे का नाम 24 जनवरी 1950 को बदला गया। यह पत्र एनआरआई सम्मेलन में लगाई गई प्रदर्शनी में प्रवासियों को आकर्षित कर रहा है। तत्कालीन आईसीएस भगवान सहाय द्वारा 6 फरवरी 1950 को लिखे गए पत्र में नाम बदलने की जानकारी दी गई है। इसमें 1916 में अवध राजघराने से लिए गए दो मछलियों, हिंदू मान्यता से धनुष तीर और गंगा जमुना की दो धाराओं वाले लोगो का उपयोग करने के निर्देश भी है। प्रवासियों को 11 मार्च 1923 को मारीशस सरकार के एमए वाल्टर द्वारा जारी विज्ञापन भी आकर्षित कर रहा है, जिसमें कोलकाता से 19 दिन की यात्रा में डाक्टर के रहने से लेकर उनके काम के घंटे, भुगतान और व्यवस्थाओं का ब्योरा है।
ताज की पेंटिंग ने रिझाया
यूपी के शोकेस में ताजमहल पर 1799 में चित्रकार थामस डेनियल की पेंटिंग से लेकर 1857 के स्वतंत्रता संग्राम, 1918 की एल्वर्ट गुडविन की पेंटिंग के साथ 1654 का रेखाचित्र भी है। 1930 में अवनींद्र नाथ टैगोर का शाहजहां का ताज देखने का चित्र सभी को रिझा रहा है। ताजमहल के अलावा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े पत्र, टेलीग्राम और चित्र भी प्रदर्शित किए गए हैं। इसमें 18 जून 1858 को जनरल आर हैमिल्टन का लार्ड कैनिंग को भेजा गया टेलीग्राम है, जिसमें रानी लक्ष्मीबाई की शहादत के बारे में बताया गया है। चलो दिल्ली के नारे, आजाद हिंद फौज का झंडा और चंद्रशेखर आजाद का हस्तलिखित पत्र भी प्रदर्शनी में है। सूबे के सभी मुख्यमंत्रियों के चित्रों के साथ अयोध्या की रामायण, सभी विभागों की योजनाओं, नोएडा और लखनऊ मेट्रो रेल के स्टॉल लगाए गए हैं।