दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर रहे 16 एनआरआई की प्रतिभा को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रवासी भारतीय रत्न अवार्ड से नवाजा है।
इन्होंने अलग-अलग क्षेत्र में अपने हुनर का लोहा मनवाया है। इनमें त्रिनिनाद एंड टोबैगो के पूर्व प्रधानमंत्री बासदेव पांडेय भी शामिल हैं। उनका जन्म वहीं पर हुआ था, लेकिन उनके पूर्वज यूपी के ही आजमगढ़ के रहने वाले थे।
इस सूची में पहला नाम है मेरठ में पैदा हुई अलका भटनागर का। यूएसए में रह रहीं सिंगर अलका की आवाज का जादू दुनिया भर में छाया है। वे अमेरिका में भारत की सांस्कृतिक राजदूत भी हैं। इसी तरह हसनपुर (मुरादाबाद) के डा. अटाट खान ने सऊदी अरब के चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा नाम कमाया है। गोरखपुर के मूल निवासी अशोक रामसरन अमेरिका में ग्लोबल आर्गेनाइजेशन ऑफ प्यूपिल ऑफ इंडिया (जीओपीआईओ) नाम से संगठन चलाते हैं। उन्होंने मानवाधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। आजमगढ़ के फ्रैंक एफ, इस्लाम ने गृह जनपद में स्कूल खोला है। प्रतिभावान छात्रों को छात्रवृत्ति भी प्रदान कर रहे हैं। कानपुर से ताल्लुक रखने वाले कंवल रेखी अमेरिका में कई संगठनों में उच्च पदों पर हैं।
लखनऊ के डा. खालिद हमीद ब्रिटिश प्रशासन में उच्च पदों पर रहे हैं। धार्मिक एकता के लिए उन्होंने जीवन भर काम किया है। इसके लिए उन्हें पद्मश्री और पद्म भूषण से नवाजा जा चुका है। मूलरूप से कानपुर के डा. कृष्ण कुमार ने अमेरिका में बाल रोग पर सराहनीय कार्य किया है। अलीगढ़ के नदीम अख्तर तरीन सऊदी अरब में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा काम कर रहे हैं। सीतापुर की डा. नंदिनी टंडन को अमेरिका में चिकित्सा क्षेत्र में अहम योगदान दिया है। बस्ती के डा. राजन प्रसाद न्यूजीलैंड की संसद के सदस्य हैं। लखनऊ के प्रोफेसर राजेश चंद्रा ने फिजी में शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान दिया है। फैजाबाद के डा. राजेंद्र तिवारी नीदरलैंड के कई संस्थानों में उच्च पदों पर रहे हैं।
लखनऊ के डा. श्रीनाथ सिंह ने अमेरिका में गरीब बच्चों के लिए स्कूल बनाने का काम किया है। कानपुर की सुमन कपूर ने न्यूजीलैंड में शिक्षा और नारी सशक्तीकरण पर काम किया है। लखनऊ की तलत एफ हसन अमेरिका की सिलिकॉन वैली में तकनीक संस्थान की स्थापना करने वाली पहली भारतीय अमेरिकी महिला हैं।