यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट 2026 के परिणाम बृहस्पतिवार को घोषित हुए, जिनमें जहां एक ओर टॉपर्स ने सुर्खियां बटोरीं, वहीं दूसरी ओर ऐसे छात्रों ने भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, जिन्होंने पढ़ाई के साथ रोजगार और स्किल सीखते हुए बेहतरीन अंक हासिल किए।
ये उदाहरण बताते हैं कि अब छात्र सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि पढ़ाई के साथ-साथ हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे छात्रों ने साबित कर दिया कि मेहनत और समय प्रबंधन के दम पर पढ़ाई और काम दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय में स्किल आधारित शिक्षा का महत्व तेजी से बढ़ा है। सिर्फ अंकों के आधार पर सफलता तय नहीं की जा सकती, बल्कि व्यवहारिक ज्ञान और आत्मनिर्भरता भी उतनी ही जरूरी है। मनोवैज्ञानिक डॉ. पूनम तिवारी ने बताया कि जो छात्र पढ़ाई के साथ कोई काम या स्किल सीखते हैं, उनमें जिम्मेदारी और निर्णय लेने की क्षमता अधिक विकसित होती है। यही कारण है कि ऐसे छात्र भविष्य में बेहतर अवसर हासिल करने में भी सक्षम होते हैं।
स्केचिंग और फैक्टरी के काम के साथ 59% अंक
यश राजपूत ने इंटरमीडिएट में 59% अंक प्राप्त किए हैं। प्रतिशत भले ही अधिक न हो, लेकिन जिम्मेदारियों के बीच हासिल यह सफलता खास है। उनके पिता अमित राजपूत स्क्रीन पेंटिंग यानी छपाई का काम करते हैं, जबकि मां अंजू राजपूत गृहिणी हैं। यश पढ़ाई के साथ-साथ स्केचिंग का काम करते हैं और लोगों के स्केच बनाकर रोजगार पाते हैं। इसके अलावा वह एक जूता फैक्टरी में भी कार्य करते हैं। स्केचिंग उनके लिए साइड बिजनेस है, जिसके जरिए वह अपनी जरूरतें पूरी करते हैं।
इवेंट कंपनी में नौकरी, फिर भी 71% अंक
दशरथ कुमार ने इंटरमीडिएट परीक्षा में 71% अंक प्राप्त कर पढ़ाई और काम के बीच संतुलन का उदाहरण पेश किया। उनके पिता मुन्नालाल रिक्शा के जरिए सामान ढोकर परिवार को पालते हैं, जबकि मां सरस्वती देवी गृहिणी हैं। जिम्मेदारी को देखते हुए दशरथ एक इवेंट कंपनी में काम करते हैं। साथ ही वह कंप्यूटर में एमएस एक्सेल और एडिटिंग भी सीख रहे हैं, जिसका उपयोग वह अपने काम में करते हैं। दशरथ का कहना है कि आगे वह बीबीए की पढ़ाई करना चाहते हैं और स्किल के जरिए और मजबूत बनना चाहते हैं।
पिता बीमार, खुद संभाला घर
राजा सागर ने इंटरमीडिएट में 79% अंक प्राप्त किए हैं और अब उनका लक्ष्य नीट परीक्षा की तैयारी करना है। उनकी सफलता के पीछे संघर्ष की बड़ी कहानी है। तीन साल पहले उनके पिता ओमप्रकाश को पैरालिसिस हो गया, जिसके बाद से वह पूरी तरह बेड रेस्ट पर हैं। मां उम्मती गृहिणी हैं। ऐसे हालात में राजा ने पढ़ाई के साथ-साथ जिम्मेदारी संभाली। कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक की जानकारी के आधार पर वह जन सेवा केंद्र चलाते हैं, जिससे परिवार का खर्च भी चलता है और उनकी पढ़ाई भी जारी है।