संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) डॉ. मुकेश अग्रवाल
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माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षा के दौरान नकल रोकने के कई दावे किए गए। 10 सचल दलों का गठन भी किया गया। पूरी परीक्षा के दौरान कोई भी सचल दल एक भी नकलची नहीं पकड़ सका। संयुक्त शिक्षा निदेशक के दल ने एक फर्जी अभ्यर्थी, सामूहिक नकल और कक्ष निरीक्षकों के पास से मोबाइल मिलने के मामले पकड़े। ऐसे में अन्य दलों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षाएं बृहस्पतिवार को समाप्त हो गई। 154 परीक्षा केंद्रों पर नकल के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई मुख्य रूप से संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) डॉ. मुकेश अग्रवाल के नेतृत्व में गठित सचल दल ने ही की। डीआईओएस चंद्रशेखर, बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड और डायट प्राचार्य अनिरुद्ध यादव के नेतृत्व वाले अन्य सचल दल निरीक्षण के बाद भी कोई भी नकलची नहीं पकड़ सका।
24 फरवरी को इंटर अर्थशास्त्र की परीक्षा के दौरान शंकर देवी इंटर कॉलेज करबना सदर में दो कक्षों में सामूहिक नकल की पुष्टि होने पर जेडी ने केंद्र व्यवस्थापक को हटाने और डिबार करने की संस्तुति डीआईओएस को भेजी थी। परीक्षा के दौरान डीआईओएस कार्यालय को नकल संबंधी दर्जनभर शिकायतें मिली थी लेकिन सचल दलों ने कोई कार्रवाई नहीं की। डीआईओएस चंद्रशेखर ने बताया कि दलों की सतर्कता के कारण परीक्षा शांतिपूर्ण रही और जिन केंद्रों के विरुद्ध शिकायतें मिली हैं, वे अगली बार केंद्र नहीं बनेंगे।