उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने छात्रों के अंक आवंटन में जमकर फर्जीवाड़ा किया है। बोर्ड परीक्षा से जुड़े दस्तावेज इसकी पुष्टि कर रहे हैं। इसका खुलासा अमर उजाला के हाथ लगी एवार्ड ब्लैंक सीट से हुआ है।
मूल्यांकन के बाद सीट में परीक्षक ने जिन 30 छात्रों को अंक आवंटित किए हैं। उन्हें अंक तालिका में बढ़ाकर अंकित किया गया है। इससे कई छात्र फेल होने से बच गए, तो कई की डिवीजन पर भी असर पड़ा है।
यह तो बानगी मात्र है, अगर जांच हुई तो बोर्ड परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े की पोल खुल जाएगी। बोर्ड परीक्षा में मूल्यांकन के बाद परीक्षक को एवार्ड ब्लैंक सीट भरनी पड़ती है।
इस तरह किया गया फर्जीवाड़ा
अंक आवंटन में फर्जीवाड़ा
- फोटो : अमर उजाला
इस सीट पर रोल नंबर के हिसाब से छात्र को दिए गए अंक भरे जाते हैं। इस पर अंकित अंक छात्र की अंकतालिका पर अंकित किए जाते हैं। यूपी बोर्ड के फर्जीवाड़े की पोल भी इसी सीट से खुली है।
हाईस्कूल परीक्षा 2018 में छात्र-छात्राओं को परीक्षकों द्वारा मूल्यांकन के दौरान प्रदान किए गए अंकों से यूपी बोर्ड ने 10 से लेकर 20 अंक तक अतिरिक्त दिए हैं। जैसे एक छात्र को परीक्षक ने दो अंक दिए, जबकि उसकी अंक तालिका में इसी विषय के अंक 23 अंकित हैं।
ऐसा किसी एक छात्र के साथ नहीं हुआ है, एवार्ड ब्लैंक सीट में शामिल सभी 30 छात्रों के अंक आवंटन में फर्जीवाड़ा हुआ है। ये सभी छात्र सुल्तानपुर जिले के हैं।
अंक आवंटन पर सवाल
अंक आवंटन में फर्जीवाड़ा
- फोटो : अमर उजाला
अंक पत्र में अंकों को बढ़ाकर देना कई सवाल खड़े कर रहा है। ऐसा तो नहीं कि सरकार की मंशा के अनुसार अच्छा रिजल्ट देने के उद्देश्य से बोर्ड की ओर से ऐसा किया गया हो। क्यों कि इस बार बोर्ड परीक्षा में काफी सख्ती रही थी।
खुद शिक्षा विभाग मान रहा था कि उत्तीर्ण छात्रों का प्रतिशत कम रहेगा, बावजूद ऐसा हुआ नहीं। हाईस्कूल का रिजल्ट 75.16 तथा इंटरमीडिएट का 72.43 प्रतिशत रहा।
जिस प्रकार से दो अंक पाने वाले परीक्षार्थी को 23 तथा पांच से नौ अंक तक पाने वाले छात्रों को पास मार्किंग 23 अंक प्रदान किए गए हैं, उससे ऐसा लग रहा है कि इस कार्य में संबंधित कालेज के संचालक का भी हाथ हो सकता है।