वर्ष 2017 में मतदान
| विधानसक्षा क्षेत्र |
मतदान प्रतिशत |
| फतेहाबाद |
70.57 % |
| एत्मादपुर |
68.12 % |
| फतेहपुर सीकरी |
67.81 % |
| खेरागढ़ |
64.17 % |
| आगरा ग्रामीण |
63.68 % |
| आगरा दक्षिण |
62.26 % |
| बाह |
60 % |
| आगरा छावनी |
59.13 % |
| आगरा उत्तर |
58.35 % |
शहर में पश्चिम, छावनी में कम रहा है मतदान
वर्ष 2012 में परिसीमन से पहले आगरा पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सबसे कम वोट डालने निकलते रहे हैं। आगरा पश्चिम और छावनी क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत पूरे जिले में कम मतदान वाले क्षेत्रों में आता रहा है। 1985 से 2002 के बीच चार बार आगरा पश्चिम क्षेत्र में मतदान 40 फीसदी से भी कम रहा।
60 फीसदी की बड़ी आबादी घरों से बाहर वोट देने के लिए निकली ही नहीं। साल 2002 में तो महज 31 फीसदी वोटरों ने अपने विधायक को चुना, जबकि 69 प्रतिशत लोग मतदान के दिन अवकाश होने पर भी घरों में ही बने रहे।
| साल |
विधानसभा क्षेत्र |
मतदान प्रतिशत |
| 1985 |
आगरा पश्चिम |
36.1 % |
| 1985 |
आगरा पूर्व |
39.4 % |
| 1989 |
आगरा पश्चिम |
33.8 % |
| 1996 |
आगरा पूर्व |
36.6 % |
| 1996 |
आगरा पश्चिम |
36.5 % |
| 2002 |
आगरा पश्चिम |
31.1 % |
| 2002 |
आगरा छावनी |
33.6 % |
मतदान हुआ कम तो बढ़ेगी प्रत्याशियों की मुश्किलें
सभी राजनीतिक दलों का जोर मतदान प्रतिशत को बढ़ाने पर है। बसपा अध्यक्ष मायावती कोठी मीना बाजार मैदान पर हुई पहली चुनावी सभा में अपने वोटरों और बसपा नेताओं से अपने हर एक वोटर से मतदान कराने की अपील करके गईं। बसपा का पूरा जोर सुबह 7 से 10 बजे के बीच ही अपने समर्थक वोटरों का मतदान कराने पर है। इसके लिए उन्होंने नारा भी गढ़ा।
इसी तरह भाजपा पन्ना प्रमुख और बूथ कमेटी के जरिए घर-घर मतदाता पर्चियां पहुंचाने में जुटी है। उनकी चिंता मतदान प्रतिशत को लेकर है, क्योंकि दलों के साथ प्रत्याशियों को पता है कि उनके समर्थकों का कम मतदान उनके लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है। आगरा उत्तर सीट पर उपचुनाव में मतदान कम हुआ था, इस वजह से सभी प्रत्याशी मतदान बढ़ाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके हैं।