एसोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल आगरा (अप्सा) के अध्यक्ष डॉ. सुशील चंद्र गुप्ता का कहना है कि यदि संक्रमण मुक्त क्षेत्रों के स्कूलों को खोला जाता है तो क्या कंटेनमेंट जोन के छात्रों और स्कूल के स्टाफ को स्कूल आने की अनुमति होगी? दस वर्ष तक के बच्चों को घर पर रहने के लिए कहा गया है, तो क्या कक्षा पांच से ऊपर की ही कक्षाएं संचालित की जाएंगी? जैसे सवालों के जवाब अभी मिलने हैं।
अभी पर्याप्त समय, योजना बनाई जा सकती है
नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल आगरा (नप्सा) के अध्यक्ष संजय तोमर का कहना है कि सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 15 अक्तूबर के बाद स्कूल खोले जाने चाहिए। कक्षावार अलग-अलग समय पर विद्यार्थियों को बुलाकर पढ़ाया जाना चाहिए। अभी पर्याप्त समय है, स्कूलों को खोलने के लिए मानकों को पूरा किया जा सकता है, योजना बनाई जा सकती है।
स्कूलों के खोलने का निर्णय गलत
आवास विकास सेक्टर-सात निवासी दीपक वार्ष्णेय ने बताया कि कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में 15 अक्तूबर से स्कूलों को खोले जाने का निर्णय गलत है। मैं इसके खिलाफ हूं। बरौली अहीर की स्वाति सिंह ने कहा कि स्कूलों को खोलने के निर्णय से मैं सहमत नहीं हूं। कोरोना संक्रमण की परिस्थितियों की अनदेखी नहीं की जा सकती है। बच्चे संक्रमित हुए तो जिम्मेदार कौन होगा।
दयालबाग के विवेद रायजादा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बच्चों को स्कूल भेजना खतरनाक हो सकता है। कोरोना संक्रमण खत्म होने तक बच्चों को स्कूल भेजना ठीक नहीं है। प्रतापनगर के अंकुर सिंघल ने कहा कि मुझे सरकार की मानसिकता समझ में नहीं आ रही है। स्कूल खोलने की ऐसी जल्दी क्या है। मैं अपने बच्चों को कतई स्कूल नहीं भेजूंगा।
स्कूल खोलने का विरोध करेगी 'पापा' संस्था
प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स आगरा (पापा) के सदस्यों की बैठक बृहस्पतिवार को शहीद स्मारक में हुई। सदस्य दीपक सरीन बताया कि संस्था ने तय किया है कि 15 अक्तूबर से स्कूल खोले जाने के निर्णय का विरोध किया जाएगा। निर्णय बदले न जाने पर सड़कों पर उतरकर विरोध किया जाएगा। बैठक में स्कूलों की मनमानी के लिए 14 शिकायतें भी संस्था को प्राप्त हुई। इन्हें जिलाधिकारी को भेजा जाएगा।