आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं तीन घंटे की होंगी। इसमें विस्तृत उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे। वस्तुनिष्ठ प्रश्न नहीं होंगे। ये निर्णय शुक्रवार को विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय की अध्यक्षता में बृहस्पति भवन में हुई परीक्षा समिति की बैठक में लिए गए।
सेमेस्टर परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों में कुल 10 विस्तृत उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमें से पांच प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। इससे पहले कोरोना की वजह से सेमेस्टर परीक्षा की अवधि दो घंटे रखी गई थी। समिति में इस बार भी परीक्षा की अवधि दो घंटे ही रखने का प्रस्ताव दिया गया। लेकिन सदस्यों ने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए तीन घंटे की ही परीक्षा कराना ठीक होगा। इस पर सहमति बन गई। बैठक में शैक्षिक सत्र 2019-20 के पदक विजेता छात्र-छात्राओं की सूची का अनुमोदन किया गया।
86 वें दीक्षांत समारोह में पीएचडी एवं डीलिट की एक अक्तूबर, 2019 से 30 नवंबर, 2021 तक की उपाधियों को वितरित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलसचिव संजीव कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्ण यादव, वित्त अधिकारी एके सिंह, प्रो. अजय तनेजा, प्रो. मीनाक्षी श्रीवास्तव, प्रो. दीपमाला श्रीवास्तव, प्रो. बृजेश रावत, औटा के अध्यक्ष डॉ. ओमवीर सिंह, महामंत्री डॉ. भूपेंद्र चिकारा और डॉ. प्रीति चौधरी उपस्थित रहीं।
परीक्षा समिति की बैठक में शैक्षणिक सत्र 2020-21 की परीक्षा के दौरान कॉलेजों में पकड़ी गई नकल और अनियमितता के संबंध में यूएफएम कमेटी की रिपोर्ट को भी रखा गया। समिति के सदस्यों की ओर से यूएफएम कमेटी की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए गए। जिस आधार पर एक कॉलेज को डिबार करने की संस्तुति की गई तो उसी आधार पर दूसरे को बचाए जाने की बात कही गई। इसलिए परीक्षा समिति के सदस्यों में से ही तीन सदस्यीय समिति बनाई गई। इसमें प्रो. अजय तनेजा, प्रो. बृजेश रावत और डॉ. भूपेंद्र चिकारा हैं। यह कमेटी यूएफएम कमेटी के सदस्यों के साथ बैठकर उसकी ओर से किए गए निर्णयों को परखेगी और दो दिन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। यूएफएम कमेटी की ओर से कुल 23 मामलों में अपनी रिपोर्ट दी थी।