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जनवरी में विश्वविद्यालयों को मिल पाएंगे रोजगारपरक कोर्स

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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों को स्नातक प्रथम वर्ष में पढ़ाने के लिए रोजगारपरक पाठ्यक्रम अभी तक नहीं मिल पाए। जबकि पाठ्यक्रम निर्धारण समिति ने 135 रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को मंजूरी नौ दिसंबर को ही दे दी थी। पाठ्यक्रमों को विश्वविद्यालय की विद्या परिषद और कार्य परिषद से मंजूरी मिलना बाकी है।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्नातक के छात्र-छात्राओं को रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को अनिवार्य रूप से और चार सेमेस्टर में पढ़ना है। प्रत्येक सेमेस्टर में रोजगारपरक पाठ्यक्रम तीन क्रेडिट का होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कॉलेजों से ही उनके यहां रोजगारपरक पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए प्रस्ताव मांगे। कुल 135 प्रस्ताव विभिन्न कॉलेजों से मिले। नौ दिसंबर को जुबली हाल में हुई पाठ्यक्रम निर्धारण समिति में सभी प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। यह भी तय किया गया कि चालू सत्र में सभी कॉलेजों को इन्हीं 135 पाठ्यक्रमों में से ही पढ़ाना है। आगामी सत्र में वह कोई नया पाठ्यक्रम शामिल करा सकते हैं।
पाठ्यक्रम निर्धारण समिति की बैठक में रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के समायोजन की जिम्मेदारी टास्क फोर्स के सदस्य सेंट जोंस कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय जैन को दी गई थी। पाठ्यक्रमों को मंजूरी देने के लिए विद्या परिषद और कार्य परिषद की बैठक अभी तक नहीं हुई न ही इसकी तारीख घोषित की गई है।
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विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर का कहना है कि दीक्षांत समारोह में व्यस्तता की वजह से इस प्रक्रिया में कुछ देरी हुई है। इसी माह विद्या परिषद और कार्य परिषद की बैठक बुलाए जाने की तैयारी है। इसमें पाठ्यक्रमों को मंजूरी मिलने के बाद कॉलेजों को जारी कर दिया जाएगा।
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