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Agra News: हवा में यूनिटी मॉल...28 करोड़ खर्च, नहीं मिली पूरी जमीन

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श​ल्पिग्राम में बन रहा यूनिटी मॉल। संवाद
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आगरा। ताजमहल के पास बनने वाले यूनिटी मॉल के नाम पर रुपये तो खर्च हो रहे हैं लेकिन निर्माण होता नहीं दिख रहा है। लोक निर्माण विभाग इस पर अब तक 28 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। इसे नवंबर तक पूरा हो जाना था मगर विभाग को पूरी जमीन ही हासिल नहीं हो सकी है।
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यूनिटी मॉल में सूबे की झांकी और हर जिले के अनूठे उत्पादों का मेला लगना था। स्थानीय बुनकरों, कारीगरों से लेकर हस्तशिल्पियों की महफिल सजनी थी। मगर सब कुछ हवा में ही है। यह स्थिति तब है जब मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में ताजमहल के पास स्थित शिल्पग्राम में इस यूनिटी मॉल के निर्माण की घोषणा की थी। 129 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए शासन ने वर्ष 2024-25 में 45 करोड़ और वर्ष 2025-26 में 21 करोड़ की राशि जारी भी कर दी है।



लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को करीब 11 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में मॉल का निर्माण करना है। पीडब्ल्यूडी भवन खंड के अधिशासी अभियंता मनीष कुमार का कहना है कि अब तक केवल 20 प्रतिशत निर्माण ही हो सका है। शेष काम को पूरा करने के लिए पूरे परिसर का खाली होना अनिवार्य है। जब तक जमीन पर कब्जा नहीं मिलता, निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सकता।
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जमीन खाली कराना बड़ी चुनौती

शिल्पग्राम परिसर वर्तमान में पूरी तरह खाली नहीं है, जिसके यह मॉल बन नहीं पा रहा है। परिसर को खाली कराने में जिला प्रशासन, आगरा विकास प्राधिकरण और पर्यटन विभाग के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। शिल्पग्राम की पार्किंग से एडीए को हर साल करोड़ों रुपये की आय होती है। ताजमहल आने वाले प्रतिदिन 10 हजार से अधिक पर्यटक वाहन इसी पार्किंग में खड़े होते हैं। इसके अलावा परिसर में पर्यटन विभाग का रेस्तरां, दुकानें और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिससे विभाग को नियमित आय होती है। ऐसे में डीएम मनीष बंसल के लिए शिल्पग्राम की जगह वैकल्पिक पार्किंग स्थल तय करना बड़ी चुनौती है।

बंद करें रेस्तरां, पार्किंग और दुकानें

मामला तूल पकड़ने पर उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक आशीष कुमार ने शिल्पग्राम के प्रबंधक को नोटिस जारी कर तत्काल प्रभाव से शिल्पग्राम खाली करने के निर्देश दिए हैं। परिसर में संचालित वाहन पार्किंग, दुकानें, एटीएम और रेस्तरां तुरंत बंद किए जाएं और पूरे परिसर को खाली कर कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित किया जाए।

लागत बढ़ने का भी डर

मॉल को पूरा करने के लिए अब लगभग छह महीने का ही समय बचा है। यदि जमीन विवाद के कारण निर्माण कार्य में और देरी हुई तो प्रोजेक्ट का एस्टीमेट (लागत) बढ़ जाएगा। जनता की गाढ़ी कमाई से बन रहे इस मॉल की लागत बढ़ने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा जो प्रशासन के लिए एक बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है।
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