यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध भीषण रूप ले चुका है। राहत की बात ये है कि ताजनगरी के सभी छात्र सुरक्षित हैं। सोमवार को दयालबाग निवासी हर्षा, रुई की मंडी निवासी शोएब और कोरथ गांव निवासी आयुष सिंह घर पहुंच गए। हर्षा, अमीषा और सुनील चौहान भी घर वापस आ गए हैं। यूक्रेन से लौटने के बाद जहां एक तरफ छात्र वहां के हालातों को याद कर डर जाते हैं, दूसरी तरफ अब उनके सामने भविष्य को लेकर चिंता है।
अधर में फंसी पढ़ाई
युद्ध के कारण अनिश्चितकाल के लिए यूक्रेन में मेडिकल कॉलेज बंद हो गए हैं। जिससे छात्रों की पढ़ाई अधर में फंस गई है। यूक्रेन से लौटे वायु विहार निवासी विवेक की मां प्रेमलता चौधरी ने बताया कि बच्चों का भविष्य खराब न हो जाए। इसके लिए सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री से यूक्रेन से लौटे छात्रों के लिए योजना बनाने की मांग की है।
सात दिन बंकर में रहे... खत्म हो गया था खाना : हर्षा
यूक्रेन के खारकीव से लौटी हर्षा ने बताया कि सात दिन उन्हें बंकर में रहना पड़ा। बाहर धमाके हो रहे थे। सात दिन बाद जब खाने-पीने का सामान खत्म हो गया, तो हम पैदल वहां से निकल लिए। ल्वीव पहुंचे फिर वहां से रोमानिया आए। रोमानिया से दूतावास की मदद से घर वापस लौटे हैं।
एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा हर्षा ने बताया कि 2 मार्च को वह खारकीव से निकली थी। उनके साथ अन्य भारतीय छात्र भी थे। हर्षा के पिता सबाजीत ने बताया कि बेटी को लेकर बहुत चिंता थी। दिनभर टीवी पर बैठा रहता था। अब बहुत खुश हूं। बेटी सही सलामत घर लौट आई है।