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UP: दो महीने की ट्रेनिंग और सालाना 20 लाख की कमाई...ऐसा बिजनेस आइडिया, इस गांव के किसानों की बदल गई किस्मत

Tue, 21 Jan 2025 07:28 PM IST
धीरेन्द्र सिंह सोनवीर सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, मलपुरा

सार

रोजगार करने से पहले ये जरूर डर लगता है कि सफल होंगे या असफल। लेकिन आगरा के मलपुरा के गांव जारुआ कटरा के किसानों ने जरा से दिमाग लगाकर ऐसा बिजनेस आइडिया खोज निकाला, जिससे उनकी किस्मत ही बदल गई। 

 
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मशरूम की खेती - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के मलपुरा के ग्राम पंचायत जारुआ कटरा के गांव मुढ़ेहरा में करीब 25 परिवार खेती और मजदूरी के साथ घर में मशरूम उगा रहे हैं। इससे उनकी कमाई बढ़ गई है। हालात बदलने लगे हैं। मुढ़ेहरा गांव के छोटी जोत वाले किसान और मजदूरों ने घर, पशुओं के बाड़े आदि में घास-फूस की झोपड़ियां बनाकर मशरूम का उत्पादन करना शुरू किया है। इस गांव में किसान ओयस्टर, बटन मशरूम उगा रहे हैं। इन ग्रामीणों को भारतीय मृदा और जल संरक्षण अनुसंधान केंद्र छलेसर से सब्सिडी भी मिली है। साथ ही अब ये मिल्खी मशरूम का भी प्रशिक्षण भी ले रहे हैं। किसानों ने बताया कि सूखी मशरूम की कीमत 650 रुपये प्रति किलोग्राम और बटन मशरूम की कीमत 150 रुपये प्रति किलो है।
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मशरूम उगाने वाले सुल्तान सिंह ने बताया कि पहले मजदूरी करते थे। अब उन्होंने 100 पैकेट ओयस्टर किस्म की मशरूम तैयार की है। दो महीने में 15 हजार रुपये की मशरूम बेच चुके हैं। उनकी पत्नी मीना देवी भी इसमें हाथ बटातीं हैं। किसान करतार सिंह और दरब सिंह ने दो बिस्वा जमीन पर झोपड़ी बनाकर मशरूम की खेती की है। करतार ने बताया कि 60 हजार की लागत में 1200 पैकेट तैयार हुए पहले लॉट में 65 हजार की बिक्री हो चुकी है। अभी दो लॉट यानि 1.30 लाख रुपये की मशरूम और तैयार होगी।

 

पुष्पा देवी का कहना है कि उन्होंने अपने घर में 80 पैकेट मशरूम तैयार की है। इससे अच्छी कमाई हो चुकी है। गांव के अन्य किसान और मजदूर दरब सिंह राकेश सिंह, भरतसिंह, खुशीराम, बच्चू सिंह, करतार सिंह, मनीष कुमार, नरेंद्र सिंह आदि लोग अपने-अपने कमरों, खेतों और पशुओं के बाड़ों में मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं।

 

मशरूम की फसल तैयार करने की विधि
10 किलो भूसे में 65 लीटर पानी ,चार ग्राम वेबस्टीन, 30 एमएल फार्मोलीन मिलाकर रात भर रखा जाता है। इसके बाद उसे सुखाया जाता है। फिर उसमें अंकुरित मशरूम बीजों को मिलाकर लकड़ी की मदद से पॉलिथीन में करीब 50 छेद किए जाते हैं। वहीं करीब 25 दिन में फसल तैयार हो जाती है। मशरूम की खेती एक बार तैयार करने में दो से तीन बार उत्पादन देती है।

 
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10 लाख रुपये तक का मिलता है अनुदान
जिला उद्यान अधिकारी अनीता सिंह का कहना है कि अगर इस गांव के किसान अपनी फसल को और बढ़ाएंगे तो उन्हें कार्य योजना में शामिल किया जाएगा। वहीं प्रशिक्षण की मांग करते हैं तो उन्हें विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिसकी अवधि दो माह की होती है। मशरूम का प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए सरकार द्वारा लागत पर 35 फ़ीसदी और अधिकतम 10 लाख रुपए का अनुदान दिया जाता है।

 
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