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माता-पिता के डांटने पर घर से निकलीं दो सहेलियां, मुसीबत में फंसीं, पुलिसवालों ने बचाया

Sun, 23 Aug 2020 04:51 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • मथुरा में किन्नरों से बचीं आगरा की दो सहेलियां 
  • माता पिता के डांटने पर घर से निकली थीं
  • पुलिस ने बचाकर चाइल्ड लाइन को सौंपा
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा की 12 और 14 साल की दो सहेलियां माता-पिता की डांट के बाद पांच दिन पहले घर से निकल गईं। वो शुक्रवार को मथुरा पहुंच गईं। उन्हें पहले कुछ युवकों ने, इसके बाद किन्नरों ने जबरन अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। सहेलियों ने वहां तैनात पुलिसकर्मियों से मदद मांगी। इस पर पुलिस ने पहुंचकर दोनों को बचाया। बाद में चाइल्ड लाइन की मदद से आगरा भेज दिया। बाल कल्याण समिति के आदेश पर दोनों को रविवार को परिजनों के सुपुर्द किया गया।

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न्यू आगरा के अबुल उलाह दरगाह निवासी 12 साल की बालिका के पिता ऑटो चालक हैं, जबकि टेढ़ी बगिया निवासी 14 साल की किशोरी के पिता राजमिस्त्री हैं। बालिका और किशोरी में पहचान थी। पांच दिन पहले माता-पिता ने किसी बात पर दोनों को डांट दिया था। इस पर घर से निकल गईं। वो वाहनों में बैठकर टूंडला, फिरोजाबाद और हाथरस तक गईं। शुक्रवार को उन्हें एक वाहन चालक मथुरा छोड़ गया। वह बस स्टैंड पर बैठी हुई थीं। 


...तो युवकों ने घेर लिया 

एक ऑटो चालक उन्हें जबरन ले जाने की कोशिश करने लगा। कुछ युवक और आ गए। वो उन्हें साथ लेकर जाने की कहने लगे, लेकिन दोनों उनकी हरकत को भांप गईं। इस पर मना कर दिया। वहां से भाग गईं। बाद में किन्नर मिल गए। वो घर में आसरा देने की कहने लगा। 

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आश्वासन दिया कि दूसरे दिन घर छोड़ देंगे। मगर, बालिका और किशोरी ने मना कर दिया। वो जबरन ले जाने की कोशिश करने लगे। यह देखकर दोनों ने पास खड़े पुलिसवालों से मदद मांगी। पुलिसकर्मी आ गए। इस पर किन्नर भाग गए। बालिका और किशोरी को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द किया। दोनों के आगरा के होने के कारण यहां भेज दिया गया।
 
माता-पिता की काउंसिलिंग
 
चाइल्ड लाइन समन्वयक रितु वर्मा ने बताया कि काउंसलर मुस्कान ने दोनों की काउंसलिंग की। उनको बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। बाद में माता-पिता मिल गए। बाल कल्याण समिति ने माता-पिता को समझाया कि उनकी जरूरतों को पूरा करें। इसके बाद दोनों को माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। 

घर से ले गई थीं रुपये 

चाइल्ड लाइन समन्वयक रितु वर्मा ने बताया कि बालिका और किशोरी पहले भी घर से चली गई थीं। देहरादून पहुंच गई थीं। यह एक आश्रय गृह में रही थीं। तब दोनों की मुलाकात हो गई थी। आगरा की होने के कारण दोस्ती हो गई। अब वो फोन से एक-दूसरे के संपर्क में रहती है। परिजनों से रोजाना कुछ न कुछ इच्छा पूरी करने के लिए कहती हैं।
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