निरंजन सिंह निवासी कूपा, थाना सेवर भरतपुर (राजस्थान) और रनवीर सिंह भी हाथों में हथियार लेकर आए थे। अभियुक्त राजेंद्र, प्रताप, निरंजन ने महाराज सिंह के पिता अतर सिंह और पिक्की को पकड़ लिया। नरेंद्र ने चाकू से दोनों पर कई वार किए। इसके बाद बंदूक से गोली मारकर दोनों की हत्या कर दी गई।
महाराज सिंह को भी मारने की कोशिश की लेकिन वह भाग निकला। वहीं बीरी सिंह को भी छत पर चढ़कर गोली मार दी। इसमें वह घायल हो गया। बीरी सिंह के शोर मचाने पर उनकी मां हरप्यारी और परिवार की महिला मटरी आईं। अभियुक्तों ने उन दोनों की भी गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद भाग गए।
पांच के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
घटना में राजेंद्र सिंह, प्रताप, नरेंद्र उर्फ मुंशी, निरंजन सिंह, रनवीर सिंह के खिलाफ बलवा, जानलेवा हमला, हत्या सहित अन्य धारा में मुकदमा दर्ज किया गया था। रनवीर सिंह की पत्रावली अलग हो गई। वर्ष 1985 में कोर्ट ने उनको बरी कर दिया गया।
अभियुक्त प्रताप और नरेंद्र उर्फ मुंशी की मृत्यु हो गई। राजेंद्र और निरंजन सिंह को कोर्ट ने दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एडीजीसी प्रदीप कुमार शर्मा ने कोर्ट में दस गवाह और सुबूत पेश किए। अभियुक्तों को फांसी की सजा की दलील दी। अभियुक्तों की उम्र अब 70 साल से अधिक है।