प्रो. विनय पाठक को कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलने के बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार में सहयोगी रहे शिक्षक और कर्मचारियों की धड़कन बढ़ गई है। पूरे दिन कोर्ट का क्या आदेश आएगा, इसी उधेड़बुन में रहे।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति रहे प्रो. विनय पाठक की याचिका खारिज होने के बाद दो कॉलेज संचालकों ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए एसटीएफ से संपर्क साधा है। कॉलेज संचालक का आरोप है घूस न देने के कारण मानक पूरे होने पर भी कॉलेज को तीसरी श्रेणी में डाल दिया गया।
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ये कॉलेज संचालक इससे पूर्व में भी अनियमितताओं का मुकदमा दर्ज करा चुके हैं। अब प्रो. पाठक को कोर्ट से कोई राहत न मिलने पर कॉलेज संचालक सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने मंगलवार की देर शाम एसटीएफ से संपर्क साधा और मुकदमा दर्ज कराने की बात कही। इसके लिए एसटीएफ ने सभी साक्ष्य लेकर आने के लिए कहा है।
दरअसल प्रो. पाठक पर एफआईआर होने के बाद आगरा में 5 मुकदमे लिखने की तैयारी थी। लेकिन कोर्ट से तारीख आगे बढ़ जाने के कारण ये मामला लटक गया। अब कोर्ट के निर्णय के बाद दो कॉलेज संचालक परीक्षा केंद्र बनाने में अनियमितता और घूस नहीं देने पर केंद्र नहीं बनाने के मामले में मुकदमा दर्ज कराएंगे।
प्रो. पाठक के सहयोगियों की बढ़ी धड़कन
प्रो. विनय पाठक को कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलने के बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार में सहयोगी रहे शिक्षक और कर्मचारियों की धड़कन बढ़ गई है। पूरे दिन कोर्ट का क्या आदेश आएगा, इसी उधेड़बुन में रहे। यहां उनके 5 करीबी बताए जाते हैं, इनमें 4 शिक्षक और 1 कर्मचारी है। कोर्स स्थायी करने, कमीशनखोरी और अन्य अनियमितताओं में उनकी भूमिका रही है।