सूचना पर परिजन भी प्राइवेट ट्रॉमा सेंटर पहुंच गए। परिजन ने बताया कि दिव्यांश कक्षा एक का छात्र है तथा अनिकेत यूकेजी का छात्र है। दोनों बच्चों को प्राथमिक उपचार दिलाने के बाद परिजन घर ले गए। हादसे की सूचना पर स्कूल स्टॉफ भी अस्पताल पहुंच गया था।
झुलसे बच्चों के चीखते ही सहम गए थे अन्य बच्चे
जिस वक्त हादसा हुआ उस समय बस के अंदर करीब 30 बच्चे बैठे हुए थे। अनिकेत और दिव्यांश के पैर पर गर्म पानी पड़ते ही उनकी चीख निकल पड़ी। बस के अंदर बैठे अन्य बच्चे कुछ समझ पाते। तब तक धुआं उठने लगा। धुआं को देख बच्चों में चीख पुकार मच गई।
चालक ने भी बस को पहले किनारे खड़ा किया। बस की चाभी निकाली। स्कूल बस में हादसे के बाद हाईवे पर दौड़ रहे वाहन भी रुक गए। आसपास पास के लोग भी एकत्रित हो गए। बस के अंदर फंसे बच्चों को बाहर निकाला गया। अभिभावकों को इस हादसे की जानकारी मिली तो वह भी मौके पर पहुंच गए।
प्रधानाचार्य सेंट जोंस कॉलेज के फादर जोसेफ शाहजी ने बताया कि हमारे स्कूल का कोई वाहन संचालित नहीं होता है। अभिभावक स्वयं ही अपनी जिम्मेदारी से बच्चों को भेजते हैं। वाहन चालकों को सीधे अभिभावक ही फीस अदा करते है। फिर भी हादसा होने के बाद हमने बस संचालक को बुलाकर फिटनेस के प्रमाणपत्र देखे जो पूरे थे। यह बस चुनाव ड्यूटी में रही थी।
बिना मानक पूरे किए हाईवे पर दौड़ रहे हैं स्कूल वाहन
स्कूल वाहन बिना मानक पूरे किए हाईवे पर दौड़ रहे है। जिम्मेदार विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे। जिससे स्कूल वाहनों से आने जाने वाले छात्र छात्राओं की जान को खतरा रहता है। इसके बाद भी विभागीय अफसर बिना मानक पूरे किए संचालित होने वाले स्कूल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करता दिखाई नहीं देता। जिले में संचालित स्कूल वाहनों की बात की जाए तो 50 फीसदी वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं है।
20 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए सहायक संभागीय परिवहन विभाग द्वारा स्कूल की बसों को अधिग्रहित करने की कार्रवाई शुरू की गई थी तो करीब 80 प्रतिशत बसों की फिटनेस पूरी नहीं थी। बसों की फिटनेस के लिए रविवार को कार्यालय भी खोला गया था। जिससे समय रहते बसों की फिटनेस पूरी हो सके। फिटनेस को पहुंची करीब आठ बसों को लौटा गया। क्योंकि बसों के मानक पूरे नहीं थे।
एआरटीओ राजेश कर्दम ने बताया कि स्कूल बसों को समय-समय पर चेक किया जाता है। जिससे हादसों को रोका जा सके। बृहस्पतिवार को हुए हादसे की जानकारी मिली है। मामले की जांच की जाएगी। जल्द ही अभियान चलाकर स्कूल वाहनों की फिटनेस चेक की जाएगी।