अपने परिजन का सहारा लेकर क्षेत्र में गतिविधियां शुरू कर दीं। उनकी यह सक्रियता दूसरे नेताओं को रास नहीं आई। जमीन के विवाद में नाम उछला तो प्रदेश के नेता ने अपना पक्ष तो रखा ही मगर दूसरे नेताजी को इसके पीछे बताया। कहा कि वह उनकी सक्रियता से परेशान हैं। इसलिए उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
इसी घटनाक्रम के बीच तीसरे नेताजी ने भी दस्तक दे दी। उन्हें अपने पुराने दिन याद आए, जब इस सीट पर उनका कब्जा था। सब कुछ ठीक था मगर उनका टिकट काट दिया गया था। यह कसक बनी हुई है। हालांकि वह उसी इलाके से विधायक हैं मगर कसक कम नहीं हुई है। ऊंचे ओहदे से कद तो कम हुआ है। तो उन्होंने भी विवादित जमीन पर पहुंचकर संदेश देने की कोशिश की। वह भी किसी दूसरे दावेदार से कम नहीं हैं।
बेटे की सक्रियता रास नहीं आ रही
जिस जमीन को लेकर उनका नाम उछाला जा रहा है, उससे उनका लेना देना नहीं है। जमीन पर कब्जे के पीछे सैफई परिवार का करीबी है। देहात के क्षेत्र में उनका बेटा जाता है। यह कुछ लोगों को रास नहीं आ रहा है। - योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा मंत्री
सर्वाधिक वोटों से जीतने वाले सांसद हैंः चाहर
मेरी किसी से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नहीं रही है। वर्ष 2019 में उन्हें टिकट मिला तो वह प्रदेश में सर्वाधिक वोटों से जीतने वाले सांसद रहे। उन्हें 64.4 फीसदी वोट शेयर मिला। यह केवल उन्हें नहीं बल्कि पार्टी के चुनाव चिह्न और मोदीजी को मिला। इस बार उनके लोकसभा क्षेत्र के लोग भाजपा को 70 फीसदी वोट देंगे। - राजकुमार चाहर, सांसद, फतेहपुर सीकरी