ये है फीडिंग की व्यवस्था
ताजनगरी के अस्पतालों में पैदा होने वाले बच्चों का रिकॉर्ड अस्पताल प्रबंधन की ओर से वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है। डाटा अपलोड होने के एक माह बाद जन्म प्रमाणपत्र ऑनलाइन डाउनलोड हो जाता है। यह पूरा डेटा वेबसाइट से पहले उत्तर प्रदेश सरकार के जन्म और मृत्यु पंजीकरण साइट पर और उसके बाद भारत सरकार की वेबसाइट पर जाता है। घरों पर जन्म लेने वाले बच्चों का प्रमाणपत्र निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर मौके पर जाकर सत्यापन के बाद बनाते हैं।
जन्म प्रमाणपत्र के लिए ये है प्रक्रिया
- बच्चे के माता-पिता का पहचान पत्र एवं फोटो
- एक माह के बाद आवेदन तो सीएमओ के आदेश
- एक साल बाद आवेदन तो मजिस्ट्रेट के आदेश, शपथ पत्र
- दो पड़ोसी गवाहों के पहचान पत्र एवं फोटो
मृत्यु प्रमाण-पत्र के लिए प्रक्रिया
- मृतक की फोटो एवं पहचान पत्र
- दाह संस्कार की रसीद
- आवेदक का पहचान पत्र एवं फोटो
- एक माह बाद आवेदन पर सीएमओ के आदेश
- एक साल बाद आवेदन पर मजिस्ट्रेट के आदेश, शपथ पत्र
- दो पड़ोसी गवाहों के पहचान पत्र एवं फोटो
जन्म प्रमाणपत्र में नाम अंकित करने के लिए
- माता-पिता के आधार कार्ड की कॉपी
- प्रार्थना पत्र और घोषणा पत्र
- बच्चे का नाम साफ अक्षरों में
यहां करें संपर्क
- नगर निगम में रजिस्ट्रार जन्म-मृत्यु कार्यालय, कमरा नंबर 302
- जोनल कार्यालय, ताजगंज, फतेहाबाद रोड
- जोनल कार्यालय, आवास विकास कॉलोनी, सेक्टर-9
- जोनल कार्यालय, हरीपर्वत, नगर निगम, भूतल
- जोनल कार्यालय, छत्ता, वाटरवर्क्स कार्यालय, भूतल
आवेदन पर दोबारा बनाएंगे
नगर स्वास्थ्य अधिकारी के डॉ. अतुल भारती ने बताया कि हमारे पास पांच वर्षों का रिकॉर्ड नहीं है। इस अवधि के प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं हो सकता। इनको डाउनलोड भी नहीं कर पाएंगे। लोग दोबारा आवेदन कर रहे हैं तो हम मैनुअल रिकॉर्ड से देखकर दोबारा बना रहे हैं। भारत सरकार की वेबसाइट पर हमारा डेटा ट्रांसफर नहीं हुआ, अब वह निगम के पास भी नहीं है।
नगर निगम की गलती
पार्षद संजय राय ने कहा कि गलती नगर निगम की है। उसे ऑनलाइन रिकॉर्ड किसी ड्राइव या वेबसाइट से रिकवर कराना चाहिए। लाखों लोग परेशान हैं। पार्षद शरद चौहान ने कहा कि एक बार जब प्रमाणपत्र बन गया तो रिकॉर्ड रखना निगम की जिम्मेदारी है। लोग क्यों परेशान हों। जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो।