सदर में सैकड़ों लोगों की रोजीरोटी पर फिर से संकट खड़ा हो गया है। बंगला नंबर 61 में अवैध रूप से बनी 58 दुकानों को ध्वस्त किया जाएगा। छावनी परिषद इसकी औपचारिकताओं को पूरा करने में लगा है।
बता दें, बंगला नंबर 61 ओल्ड ग्रांड सी लैंड हैं। इस पर 58 दुकानें बनी हैं। छावनी परिषद की ओर से समय-समय पर दुकानों को तोड़ने की बात कही जाती रही है। इसके विरोध में दुकानदार 1993-94 में स्थानीय कोर्ट में चले गए। कोर्ट ने 2009 में दुकान तोेड़ने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ दुकानदार हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने भी 2011 में तोड़ने का आदेश दिया। दुकानदारों ने 2013 में रिट पिटीशन दाखिल की। यह भी खारिज हो गई। इसके बाद परिषद ने कार्रवाई शुरू की, तो दुकानदारों ने विरोध किया। उस समय यूपीए की सरकार थी। दुकानदार डिफेंस मिनिस्ट्री स्टैडिंग कमेटी के चेयरमैन राजबब्बर के पास पहुंचे। उन्होंने रक्षा संपदा महानिदेशक से चर्चा कर दुकानदारों को मोहलत देने को कहा। इस पर रक्षा संपदा ने प्रशासनिक स्टे लगा दिया। बता दें, यह स्टे बीस साल से ज्यादा पुराने निर्माण पर लिया जाता है। केंद्र में भाजपा की सरकार के आते ही रक्षा संपदा महानिदेशालय ने प्रशासनिक स्टे हटा लिया है। दुकानों को जल्द तोड़ने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अफसरों ने जिला प्रशासन व पुलिस से संपर्क किया है। ताकि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।
रक्षा संपदा महानिदेशालय से निर्देश मिल चुके हैं। जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
डा. अशोक शर्मा, छावनी प्रवक्ता
- रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखा था कि बीस साल पुराने निर्माण को मंत्रालय की अनुमति से ही तोड़ने का नियम है। कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर हमें नोटिस दें। उसके बाद हम अपनी कानूनी कार्रवाई करेंगे।
अरुण गुप्ता, सचिव, सदर बाजार व्यापार समिति