कासगंज में इरादे खतरनाक थे, साजिश पक्की थी। खुराफातियों ने नफरत की चिंगारी सुलगा ही दी थी। सोचा था कि कि कासगंज से उठी सांप्रदायिक हिंसा की आग से कुछ और लपटें निकलेंगी।
हालांकि उन्हें पता नहीं था कि यह अमांपुर है, इसकी पहचान ही अमन और प्यार है। यही कारण है कि इसका नाम अमनपुर था जो बाद में अमांपुर हुआ। यहां के लोगों के दिलों में मोहब्बत की मिठास है। यहां नफरत के लिए कोई जगह नहीं है।
इस वजह से खुराफातियों के मंसूबे यहां नाकाम हो गए। सुबह थोडी़ देर के तनाव के बाद जिंदगी ने अपनी रफ्तार पकड़ ली। बाजार खुले, चहल पहल भी रही, बच्चे स्कूल गए। मस्जिद में नमाज हुई तो मंदिर में आरती भी। ऐसा लगा ही नहीं कि कुछ हुआ था।
खुराफातियों ने धर्मस्थल में तोड़फोड़ आगे की तरफ की, जिससे सबको आसानी से नजर आए। इसके दाईं और ही दूसरे समुदाय का धर्मस्थल है। बीच में सिर्फ एक खेत है। स्पष्ट नजर आ रहा था कि मंसूबा आंच को हवा देने का था लेकिन चाल चल नहीं सकी। थोड़ी ही देर में हालात सामान्य हो गए।
धार्मिक स्थल के बाहर तैनात पुलिसकर्मी
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तोड़फोड़ टंकी नगला में की गई थी। इसके पास का बाजार पूरी तरह खुला। एक दुकान पर कुछ लोग जमा थे। इनमें 60 साल के नाथीराम का कहना था कि साफ लग रहा है कि यह साजिश है आग लगाने की।
भाई-भाई की तरह रहने वाले लोगों को आपस में लड़ाने की, मगर वे गलती कर रहे हैं। यहां दाल गलने वाली नहीं है। राजकुमार का कहना था कि यह अमनपुर है, यहां रामलीला के मंच के बराबर से ताजिये निकल जाते हैं।
ईद पर हिंदू मुस्लिमों के घर सिवइयां खाने जाते हैं। दिवाली पर मुस्लिम मुबारकबाद देते हैं और मिठाई खाते हैं। यहां त्योहार मिलकर मनाए जाते हैं। कभी कोई फसाद नहीं हुआ।
रफीक मियां का कहना था कि यह खुराफात कोई पहली दफा थोड़े ही हुई है। चार दिन पहले भी तीन खोखों में आग लगाई गई थी। ईदगाह के मुतवल्ली नवाब अली बोले, पुलिस अपना काम कर रही है, जिसने भी खुराफात की है, वह पकड़ा जाएगा। यहां कोई तनाव नहीं है।
लाइटें खराब थीं, अंधेरे में की गई तोड़फोड़
नगर पंचायत की लापरवाही भी तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार मानी जा रही है। कासगंज के तनाव भरे माहौल के बावजूद अमांपुर में लाइटें ठीक नहीं कराई गई।
तोड़फोड़ किए गए धर्मस्थल के बाहर लगी लाइट खराब थी। इसके आस पास की लाइटें भी काम नहीं कर रही । रात के घुप अंधेरे में खुराफातियों ने हरकत की। तोड़फोड़ के बाद लाइटें ठीक कराई गई।
कासगंज में हिंसा के बाद देहात में सबसे पहले घटना अमांपुर में ही हुई। चार दिन पहले तीन खोखे फूंक दिए गए थे। इसके बावजूद पुलिस तैनात नहीं की गई। यह भी मालूम करने का प्रयास नहीं किया गया कि आग किसने लगाई? अब धर्मस्थल में तोड़फोड़ के बाद पुलिस बल तैनात किया गया है।