नौ करोड़ पौधे लगाकर वर्ल्ड रिकार्ड बनाने की मुहिम तो प्रदेश सरकार ने बीते साल चला दी, लेकिन जो पौधे लगाए गए, उनमें से अधिकांश देखरेख न होने से सूख चुके हैं।
पीडब्ल्यूडी, पशुपालन, उच्च शिक्षा, पंचायती राज और राजस्व विभाग जैसे कई विभागों ने पौधे लगाने की रिपोर्ट तक नहीं भेजी है। इन विभागों ने पौधे कहां लगाए, इसकी पड़ताल के लिए जीओ टैगिंग रिपोर्ट का 9 महीने से इंतजार किया जा रहा है।
प्रदेश सरकार की पौधरोपण मुहिम में सरकारी विभाग ही बाधा बन गए। नगर विकास, पंचायतराज, ग्राम्य विकास जैसे विभागों ने आनन फानन में बिना तैयारी के पौधे तो लगा दिए, लेकिन उनकी देखरेख नहीं की।
नगर निगम ने सड़क किनारे और डिवाइडरों पर पौधे तो लगाए, लेकिन न दूरी का ख्याल किया और न ही प्रजातियों की मृत्यु दर का, ऐसे में पौधा लगाने के दो महीने के अंदर ही यह सूख गए। मारुति इस्टेट, आवास विकास, शाहगंज बोदला, एमजी रोड समेत शहर में कई जगह ऐसी हैं, जहां पौधों के नाम पर ठूंठ रह गए तो कहीं पर तो वह भी न बचे।
मुख्य वन संरक्षक, आगरा, जावेद अख्तर का कहना है कि हमने जो पौधे लगाए हैं, उनकी मृत्यु दर कम है। कई अन्य विभागों ने भी पौधरोपण किया है, लेकिन उन्होंने जीओ टैगिंग की रिपोर्ट नहीं भेजी है’
बीते साल हुए पौधारोपण अभियान में हर पौधे की जीओ टैगिंग रिपोर्ट तैयार की जानी थी। 15 अगस्त को पौधारोपण के एक महीने बाद सितंबर 2018 तक जीओ टैगिंग और मृत्यु दर की रिपोर्ट भेजनी थी, लेकिन आगरा विकास प्राधिकरण, नगर निगम, चिकित्सा, शिक्षा विभाग, लोक निर्माण विभाग, रक्षा संपदा, छावनी परिषद, पशु चिकित्सा, औद्योगिक विकास, पशु पालन, पंचायती राज विभाग ने रिपोर्ट ही नहीं भेजी हैं।