एंडोडोंटिक एक्सीलेंस फाउंडेशन की कार्यशाला में विशेषज्ञों ने नई तकनीक पर व्याख्यान दिए। इस कार्यशाला में आगरा और मथुरा के चिकित्सक शामिल हुए। दूरबीन विधि से दांतों की रूट कैनाल के बारे में भी जानकारी दी गई।
दांतों की बीमारियों में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग होगा। इससे शुरुआती दौर में ही दांतों की बीमारी चिह्नित हो सकेगी। रूट कैनाल भी बेहतर होगा। दांत निकालने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। ये बातें फतेहाबाद रोड स्थित होटल में एंडोडोंटिक एक्सीलेंस फाउंडेशन की कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहीं।
विज्ञापन
कार्यशाला में नई तकनीक पर व्याख्यान दिए गए। इसमें आगरा-मथुरा के करीब 150 चिकित्सक शामिल हुए। मुख्य वक्ता पुणे के डॉ. विवेक हेगड़े ने बताया कि दांतों में झनझनाहट, ठंडा-गर्म, कीड़ा लगने और दर्द की समस्या होने पर लोग दांत निकलवाने की सोचते हैं।
अब एआई आधारित सीबीसीटी स्कैन, माइक्रोस्कोप और लेजर से दांतों की पहले चरण में ही बीमारी की सटीक जांच संभव है। दूरबीन विधि से दांत में अतिसूक्ष्म छिद्र से रूट कैनाल कर सकते हैं। दांतों में कैप लगाने की जरूरत बेहद कम होगी और दांतों की उम्र भी बढ़ जाएगी। इस तकनीकी के उपयोग से दांत निकालने की नौबत नहीं आएगी।
अध्यक्ष डॉ. आशीष गुप्ता और सचिव डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव ने कहा कि दांतों की बीमारी को नजरअंदाज करने से गंभीर रोगों के पनपने का खतरा अधिक रहता है। इससे पहले मुख्य अतिथि डॉ. एसके कठारिया, डाॅ़ मनीष शर्मा, डॉ. राजदीप, डाॅ़ संजय गौतम और डाॅ़ अजय नागपाल ने कार्यशाला का शुभारंभ किया।
संयोजक डॉ. विपुल अरोरा ने सभी का आभार जताया। कार्यशाला में डॉ. अमित नारायण, डॉ. जया पंबू, डॉ. चकित माहेश्वरी, डाॅ़ सुषमा प्रतिहार, डाॅ़. असीम शिरोमणि, डाॅ़ श्रेया कपूर, डाॅ़ दीपक कुरुप, डाॅ़ पुनीत श्रीवास्तव, डॉ. श्रेय कपूर, डॉ. भरत चौहान, डाॅ़ राहुल तेहरिया आदि भी मौजूद रहे।