सरकारी चिकित्सकीय संस्थानों में पार्किंग के नाम पर उगाही
जिला अस्पताल और एसएन मेडिकल कालेज में एक रुपये में महंगी जांच और इलाज भी उपलब्ध है। लेकिन यहां दोपहिया वाहन से आने के लिए 10 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। मरीज की हालत खराब हो, या छुट्टे पैसे न हो, लेकिन एंट्री तभी जब रुपये उनके हाथ में थमा दिए जाएं। अगर किसी ने विरोध करने की जुर्रत भी की तो उसे अपशब्द कहे जाएंगे। यहां तक कि पिटाई भी संभव है। एसएन और जिला अस्पताल में मरीजों के तीमारदारों के साथ पार्किंग ठेकेदारों का यही रवैया रहता है। इसकी शिकायत कई बार अधिकारियों से की जा चुकी है, बावजूद इन पर लगाम लगाने की जहमत नहीं उठाई गई।
बोर्ड पर दर्ज कीमत से दो गुना वसूली
एसएन मेडिकल कालेज की पार्किंग में साइकिल, मोटर साइकिल, कार के लिए क्रमश: दो, पांच और 10 रुपये बोर्ड पर दर्ज हैं। मरीजों और तीमारदारों से इससे दो गुना रुपया वसूला जाता है, पर्ची पर अधिक ली जा रही कीमत भी दर्ज है।
प्रदेश सरकार का है आदेश
जिला अस्पताल में बीते महीनों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने दौरा किया था। उनके सामने भी पार्किंग के ठेकेदार की गुंडागर्दी और रुपये ज्यादा लेने की शिकायत की गई थी। मंत्री ने पार्किंग का पैसा न लेने की बात भी कही।
लेडी लायल में नहीं लिए जाते रुपये
महिला जिला अस्पताल भी इसी सरकारी सेवाओं की एक कड़ी है, लेकिन यहां पार्किंग के लिए रुपये नहीं लिए जाते हैं। अगर ऐसा है तो एसएन और जिला अस्पताल में भी पार्किंग फीस से छुटकारा क्यों नहीं।
टेंडर में तय कीमत से अधिक रुपये वसूलने की जांच की जाएगी। ऐसा हो रहा है तो उसका टेंडर भी निरस्त किया जा सकता है। डा. एसके गर्ग, प्राचार्य एसएन मेडिकल कालेज
सवा तीन लाख रुपये में टेंडर उठा है, ये पैसा सरकारी खजाने में जाता है। मंत्री जी ने पार्किंग शुल्क कम करने की बात कही थी, अगले टेंडर से लागू किया जाएगा। मरीजों से अभद्रता बर्दाश्त नहीं है। डा. प्रमोद गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल