आगरा के थाना शाहगंज के भोगीपुरा मेवाती, गली निवासी ट्रांसपोर्टर असगर अली का शव शनिवार सुबह मलका चबूतरा क्षेत्र में सड़क पर मिला। शव पर चोट के निशान थे। परिजन उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर गए। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। हादसे से कुछ घंटे पहले ही उनका माल से भरा ट्रक फतेहपुर सीकरी टोल के पास जीएसटी की टीम ने पकड़ा था। परिजन दो जीएसटी की महिला अधिकारियों पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। ट्रांसपोर्टर का एक महिला जीएसटी अधिकारी से पहले से विवाद चल रहा है। महिला अधिकारी उनके ऊपर चौथ मांगने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करा चुकी हैं। ट्रांसपोर्टर भी न्यायालय में प्रार्थना पत्र देने के साथ कई जगह शिकायत कर चुके हैं।
असगर अली (51) का रामनगर की पुलिया के पास अजमल ट्रांसपोर्ट नाम से कार्यालय और गोदाम है। भतीजे हर्षद ने बताया कि असगर अली रात 11 बजे घर से निकले थे। गोदाम से ट्रक लोड करवाकर जयपुर में माल डिलीवरी कराने जा रहे थे। चालक मिढ़कुर निवासी लोकेंद्र ट्रक चला रहा था। 2 बजे रात असगर ने घर पर कॉल की और बताया कि फतेहपुर सीकरी के कौरई टोल के पास जीएसटी की रेशू त्रिपाठी ने ट्रक रुकवा लिया। उनके पास माल के सारे बिल थे। इसके बाद भी 112 पर कॉल कर पुलिस बुला ली। उन्हें वहीं ट्रक से उतरवा कर ट्रक को जयपुर हाउस स्थित जीएसटी कार्यालय भेज दिया। वह अब जयपुर हाउस जा रहे हैं।
परिवार के लोगों ने विभाग के कई अधिकारियों को उसी समय कॉल किया पर कोई बात नहीं हो पाई। सुबह 5:45 बजे एक राहगीर ने असगर के मल का चबूतरा के पास पड़ा होने की सूचना दी। बहन नाजिमा और परिवार के लोग पहुंचे और उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजन का आरोप है कि जीएसटी की सहायक आयुक्त ने साजिश करते हुए हत्या कराई है। वहीं मामले में एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने बताया कि सीसीटीवी में एक कार से ट्रांसपोर्टर को टक्कर मारने की पुष्टि हुई है। परिजन के कहने पर वीडियोग्राफी के साथ चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया है। कार और चालक का पता लगाया जा रहा है। परिजन जो भी तहरीर देंगे,उसके आधार पर भी जांच की जाएगी।
नवंबर 2025 से चल रहा विवाद
असगर अली के बेटे अब्दुल ने बताया कि नवंबर 2025 में उनका एक ट्रक जीएसटी की टीम ने पकड़ लिया था। दस्तावेज दिखाने पर भी 4.5 लाख रुपये जुर्माना और टैक्स के नाम पर लिया गया था। 3 लाख 6 हजार की रसीद दी गई थी। गाड़ी की क्षमता से अधिक माल दिखाया गया था। मामले की पिता ने विभाग के अधिकारियों के साथ लोकायुक्त से शिकायत की थी। न्यायालय में भी प्रार्थनापत्र दिया गया था। दबाव बनाने के लिए पिता पर चौथ मांगने का आरोप लगाकर प्राथमिकी दर्ज करा दी गई थी।
सूचना के आधार पर टीम ने ट्रक को रोका था। विवाद होने पर 112 को सूचना दी थी। पुलिस की मौजूदगी में ट्रक को कब्जे में लेकर रात करीब तीन बजे कार्यालय में दाखिल किया गया था। मृतक के परिवार के प्रति सहानुभूति है। जांच एजेंसी जो भी सहयोग चाहेंगी, विभाग उन्हें सहयोग देगा।
-पंकज गांधी, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन