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यमुनापार भी इमारत छोड़ दीवारें ही ढहाईं

Fri, 05 Jun 2015 01:46 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
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यमुना के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सख्त रुख के बाद भी आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ध्वस्तीकरण अभियान के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है। यमुनापार क्षेत्र में भी पिछले अभियान की तरह सिर्फ बाउंड्री ही ढहाई गईं। जबकि दो कदम की दूरी पर खड़ी इमारतों को हाथ तक नहीं लगाया। लगभग दो घंटे तक चले अभियान के दौरान तीन अवैध निर्माणों पर एडीए का बुल्डोजर चला। बकि एक ने नोटिस मिलने के बाद स्वत: ही अवैध निर्माण को ढहा दिया।
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एनजीटी का नोटिस मिलने के बाद यमुना के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण के लिए एडीए का पिछले एक पखवाड़े से अभियान चल रहा है। दयालबाग के बाद गुुरुवार को यमुनापार क्षेत्र के फाउंड्री नगर में कार्रवाई की गई। उपसचिव जगदीश यादव और सुनीता यादव के नेतृत्व में टीम भारी पुलिस बल के साथ सबसे पहले फाउंड्री स्थित जगदम्बा डिग्री कॉलेज पहुंची। इस कालेज की बाउंड्री को गिरा दिया। बुल्डोजरों का अगला निशाना बना दयाराम प्रजापति का डीपीआर एजूकेशनल इंस्टीट्यूट। 15 मिनट की मशक्कत के बाद नदी में बनी इस इंस्टीट्यूट की बाउंड्री को भी ढहा दिया गया। जबकि दो कदम की दूरी पर इन कालेजों की इमारत को छुआ तक नहीं। इसके बाद इसी के बगल में श्याम प्रकाश लोधी के काफी बड़े क्षेत्रफल में विकसित की जा रही कॉलोनी की बाउंड्री गिराई गई। इसके बाद सड़कों को उखाड़ दिया। कालोनी में बिजली के तारों के लिए लगाए खंबे भी गिरा दिए। इन तीन निर्माणों को ध्वस्त करने के बाद एडीए की टीम लाखन सिंह के नदी किनारे अवैध निर्माण को ध्वस्त करने पहुंची। मगर, उन्होंने डूब क्षेत्र में बनी ट्यूबवेल का छोटा कमरा स्वत: ही ध्वस्त कर लिया। अमीर चंद द्वारा बनाई गई धर्मशाला 1973 से पहले की है। ऐसे में उसको नहीं ढहाया गया। एडीए अधिकारियों का कहना है कि एडीए सिर्फ उन्हीं अवैध निर्माणों पर कार्रवाई कर रहा है जो उनके विभाग के अस्तित्व में आने के बाद खड़े हुए है। शाम तक चले अभियान के दौरान एडीए की टीम ने तीन निर्माण ध्वस्त किए। जबकि एडीए को यमुनापार क्षेत्र में छह अवैध निर्माण ध्वस्त करने थे।  
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काफी देर से मिला पुलिस बल
ध्वस्तीकरण कार्रवाई के लिए एडीए को काफी देर बाद पुलिस बल मिला। अभियान को अंजाम देने के लिए एडीए के अधिकारी सुबह 10 बजे ही थाना एत्माद्दौला पहुंच गए थे। मगर, यहां थानाध्यक्ष को वरिष्ठ अधिकारियों का कोई निर्देश नहीं था। इसके लिए चलते दोपहर तीन बजे तक न तो उन्हें पीएसी मिल पाई और न ही थाने की पुलिस। उपसचिव जगदीश यादव इसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देते रहे। उनके हस्तक्षेप के बाद ही साढ़े तीन बजे के आसपास पुलिस बल मिल सका। उप सचिव का कहना है कि अभियान के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने को दो जून को ही वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिख दिया गया था।
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एडीए कर्मियों को थाने से बाहर किया
पुलिस बल के लिए एडीए की टीम ने थाना एत्माददैला में सुबह से ही डेरा डाल दिया था। काफी देर तक पुलिसकर्मियों ने एडीए कर्मियों की सुनी ही नहीं। इस पर जब एडीए कर्मी भड़के तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें थाने से बाहर जाने को कह दिया।
इनसेट
क्या बाउंड्री छूकर लौट जाएगा नदी का पानी?
ध्वस्तीकरण कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद लोग एडीए अधिकारियों की कारगुजारी देख तरह-तरह की बातें कर रहे थे। भवन छोड़ चार-पांच फुट ऊंची बाउंड्री गिराकर जब एडीए की टीम लौटने लगी तो लोग कहने लगे कि यमुना में जब बाढ़ आएगी तो क्या उसका पानी सिर्फ बाउंड्री छूकर ही लौट जाता।
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आखिर क्या है सिंचाई विभाग का पैमाना?
अवैध निर्माणों के नाम पर एडीए सिर्फ बाउंड्री ही तोड़ रहा है। इसके बारे में जब संबंधित अधिकारियों से पूछा जाता है तो उनके पास इतना ही जवाब होता है कि सिंचाई विभाग ने जो चिह्नित किया था, उसी पर कार्रवाई की जा रही है। यह चिह्न किस आधार पर लगाए गए, इस बारे में एडीए अधिकारियों को भी नहीं पता। वह भी तब जब वर्ष 2013 में जब डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों का चिह्नांकन हो रहा था तो सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग के अलावा एडीए के अधिकारी भी उसमें शामिल थे।
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