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Agra: ग्रीन कॉरिडोर से एंबुलेंस की राह होगी आसान, यातायात पुलिस जीरो ट्रैफिक पर देगी रास्ता

Sun, 07 Apr 2024 11:21 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

ताजनगरी में ग्रीन कॉरिडोर से एंबुलेंस की राह आसान होगी। यातायात पुलिस जीरो ट्रैफिक पर एंबुलेंस को रास्ता देगी। कंट्रोल रूम का नंबर 9454457886 जारी कर दिया गया है।
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एंबुलेंस।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा में मरीजों को एंबुलेंस से अस्पताल तक ले जाने में अब एमजी रोड पर जाम बाधा नहीं बनेगा। यातायात पुलिस के कंट्रोल रूम पर कॉल करने पर ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। यातायात पुलिस सभी सिग्नल को ग्रीन कर जीरो ट्रैफिक पर एंबुलेंस को रास्ता देगी। कंट्रोल रूम का नंबर 9454457886 जारी कर दिया गया है। यह सुविधा शुरू कर दी गई है।

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एसीपी सैयद अरीब अहमद ने बताया कि एंबुलेंस चालक, हॉस्पिटल संचालक-कर्मचारी और मरीज के तीमारदार यातायात पुलिस के इस कंट्रोल रूम पर कॉल कर सकते हैं। बताना होगा कि एंबुलेंस को कहां से कहां और कब जाना है। कंट्रोल रूम पर तैनात पुलिसकर्मी यह सुनिश्चित करेंगे कि एंबुलेंस को किसी चौराहे पर रेड लाइट नहीं मिले। ग्रीन कॉरिडोर कर एंबुलेंस को निकाला जाएगा। कंट्रोल रूम में तैनात टीएसआई हरीश चंद गौतम पब्लिक एड्रेस सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों की मदद से रास्ते से ट्रैफिक को क्लीयर कराएंगे।

हालांकि कई मार्ग पर जाम से निपटना आसान नहीं है। एमजी रोड पर ही भगवान टॉकीज से लेकर प्रतापपुरा तक दीवानी, सूरसदन, हरीपर्वत, सेंट जोंस चौराहा, सुभाष पार्क तिराहा, कलेक्ट्रेट, स्टेट बैंक तिराहा, साईं का तकिया चौराहे आते हैं। सात किमी की दूरी में कई जगह जाम की समस्या रहती है। दोपहर में स्कूलों की छुट्टी के समय वाहनों का ज्यादा दबाव रहता है। ऐसे में पुलिस के लिए भी रास्ता क्लीयर करना आसान नहीं होगा।

गोल्डन आवर है महत्वपूर्ण

किसी हादसे में घायल व्यक्ति के लिए पहला एक घंटा महत्वपूर्ण होता है। इसे गोल्डन आवर कहा जाता है। इस दौरान इलाज मिलने पर जान बचने की संभावना अधिक होती है। मगर, कई बार इलाज के लिए देरी से पहुंचने के कारण घायल की जान चली जाती है।

जाम में फंसता देख करें कॉल

यातायात पुलिस का कहना है कि एंबुलेंस के कहीं भी जाम में फंसने पर राहगीर भी 9454457886 पर कॉल कर सकते हैं। कंट्रोल रूम के नंबर पर सूचना मिलने पर यातायात पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया जाएगा। सीसीटीवी से निगरानी भी की जाएगी। जरूरत पर क्यूआरटी (क्विक रेस्पांस टीम) भी पहुंचेगी।

क्या है ग्रीन कॉरिडोर

बड़े शहरों में ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था की गई थी। पहले अंग ट्रांसप्लांट के लिए जाने वाली एंबुलेंस को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर रास्ता दिया जाता है। मगर, अब यह व्यवस्था आम एंबुलेंस के लिए की जा रही है।

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