आगरा में गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व पर पांच जनवरी को गुरुद्वारा गुरु के ताल से नगर कीर्तन यात्रा निकाली जाएगी। इस दौरान शहर के कई रास्तों पर यातायात परिवर्तित रहेगा। इसके लिए यातायात पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
- बसंत टाकीज चौराहा, चौकी घटिया आजम खां, फुलट्टी रोड, सेव का बाजार से सुबह दस बजे से दोपहर ढाई बजे तक कोई भी व्यवसायिक छोटे और बड़े वाहन माईथान, घटिया आजम खां की ओर नहीं जा सकेगा। यह वाहन अन्य वैकल्पिक मार्ग से जाएंगे।
- पीपल गेट, हॉस्पिटल रोड तिराहा, रावतपाड़ा से एक बजे से शाम 4:30 बजे तक कोई भी व्यवसायिक छोटा और बड़ा वाहन फुव्वारा चौराहा की ओर नहीं जा सकेगा।
- हींग की मंडी और कलक्ट्रेट रेलवे ओवर ब्रिज से सदर भट्टी की ओर शाम चार बजे से रात साढ़े आठ बजे तक कोई भी व्यवसायिक वाहन सदर भट्टी की ओर नहीं जाएगा।
- कलक्ट्रेट तिराहा, साईं की तकिया, प्रतापपुरा चौराहा, क्लब चौराहा से शाम साढ़े चार बजे से रात साढ़े दस बजे तक कोई भी वाहन भारतीय स्टेट बैंक तिराहा की ओर नहीं जा सकेगा। यह वाहन भारतीय स्टेट बैंक तिराहा से कलक्ट्रेट की ओर जाने वाले रास्ते से ही जा सकेंगे।
- भारतीय स्टेट बैंक तिराहा से छीपीटोला चौराहा, बालूगंज चौराहा की ओर कोई भी वाहन शाम साढ़े चार बजे से रात साढ़े दस बजे तक नहीं जा सकेगा।
- करियप्पा चौराहा, छीपीटोला ढलान, मूर्ति तिराहा, उत्तराखंड की राज्यपाल के आवास के पास से रात आठ बजे से 11 बजे तक कोई भी वाहन बालूगंज चौराहा की ओर नहीं आएगा। यह वाहन अन्य वैकल्पिक रास्तों से जाएंगे।
गतका का अभ्यास कर बहाया पसीना
गुरुद्वारा गुरु के ताल में संत बाबा प्रीतम सिंह के नेतृत्व में गुरनाम सिंह ने खिलाड़ियों को गतका का अभ्यास कराया। तीरंदाजी, तलवारबाजी, कटार, भाला, गदा, गुरच, चक्कर, जंगसफा, निशानेबाजी का अभ्यास किया गया।
खिलाड़ियों को हमले से बचाव करने और आक्रमण करने के वक्त हथियारों के उपयोग के बारे में जानकारी दी। शनिवार को भी अभ्यास किया जाएगा। श्रीगुरु सिंह सभा माईथान के प्रधान कंवलदीप सिंह ने बताया कि यात्रा में अग्निचक्र का प्रदर्शन खास होगा। खिलाड़ी गुरु गोविंद सिंह की शाही सेना के रूप में गतका का प्रदर्शन करेंगे।
गुरु हरगोविंद साहिब ने की थी शुरुआत
सिख धर्म के छठे गुरु हरगोविंद साहिब ने प्राचीन युद्ध कला के प्रदर्शन की शुरुआत की थी। उन्होंने संगत को हुक्म दिया था कि जब गुरु के घर आएं तो अच्छे शस्त्र और घोडे़ भेंट करें। गुरुजी ने शक्ति-भक्ति का मिलाप कर संत सिपाही का रूप दिया।
गुरुद्वारा गुरु के ताल में संत बाबा साधू सिंह मोनी से शुरू हुई इस विधा का संत बाबा निरंजन सिंह के बाद मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह की देखरेख में संचालन हो रहा है। यहां 50 बच्चों को संत बाबा प्रशिक्षण दे रहे हैं।