विधानसभा चुनाव से पहले बसपा की तरह सपा सरकार ने भी पर्यटन निगम की इकाइयों के निजीकरण की कवायद शुरू की है। घाटे और बंद पड़ी इकाईयों के निजीकरण के नाम पर प्रदेश के 37 टूरिस्ट बंगलों को 30 साल के लिए लीज पर दिया जाएगा। बाद में 30 साल के लिए ही लीज बढ़ाने का नियम भी है।
इन इकाइयों में काम कर रहे पर्यटन निगम के कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) समेत तीन विकल्प दिए जाएंगे। बसपा सरकार के ग्रुप टेंडर के उलट सपा सरकार ने हर इकाई के लिए अलग-अलग टेंडर निकाला है।
बसपा सरकार ने चुनाव से ऐन पहले 2011 में निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन सपा सरकार में यह प्रक्रिया रुक गई। कार्यकाल पूरा होने से पहले सपा सरकार ने भी वही प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन नई शर्तों और नए कंसलटेंट के साथ। पुरानी शर्तों में लीज रेंट में पांच फीसदी हर साल की बढ़ोतरी थी और पांच साल के बाद कुल व्यवसाय की पांच फीसदी राशि वसूलनी थी लेकिन नई शर्तों में एक रुपया वार्षिक लीज रेंट तय किया है। पर्यटन निगम के कर्मचारी लीज की प्रक्रिया में बड़े खेल का आरोप लगा रहे हैं।
ये हैं इकाइयां
बंद पड़े पर्यटन निगम के राही टूरिस्ट बंगलों में गोकुल, राधाकुंड, शुक्रताल, बरसाना, नगला चंद्रभान, पटना पक्षी विहार, शिकोहाबाद, हरगांव, नरौरा, कछला, भदोही, चुनार, मुंशीगंज, सोरों, कांधला, भूपिया मऊ, देवरिया, देवकली, खुर्जा, संदी झील, बिठूर, रामगढ़ ताल, बस्ती, कालिंजर, मुजफ्फर नगर शामिल हैं, वहीं घाटे की इकाइयों में बटेश्वर, वृंदावन, गोकुल रेस्टोरेंट, सोनोली, संकिसा, महोबा, नीमसर, कपिलवस्तु, देवगढ़, टीआरसी मथुरा, देवाशरीफ और टाइगर देन पलिया शामिल हैं।
पीपीपी मोड पर इन्हें चलाएंगे
घाटे की 33 इकाइयों के साथ सात बंद इकाइयों को पीपीपी मोड पर चलाने का प्रस्ताव है। इनमें पर्यटक आवास गृह सुमेर सिंह किला इटावा, नौगढ़ सिद्वार्थ नगर, अलीगढ़, संत रविदास नगर, फतेहपुर के खागा, मेरठ के सरधना और गोरखपुर के पर्यटक आवास गृह शामिल हैं।
21 साल घाटा, 18 साल फायदा
पर्यटन निगम ने साल 2013 तक अपनी संपत्तियों का मूल्यांकन कराया है। इसके मुताबिक, 39 सालों के संचालन में 21 साल निगम घाटे में चला, जबकि 18 साल उसे फायदा हुआ। इसी आंकड़े का फायदा उठाकर निगम की संपत्तियों के निजीकरण की कवायद की गई। भारत सरकार के सहयोग से बनाई गई 31 इकाइयों को लीज पर देने के लिए भारत सरकार से अनुमति ली जा रही है।
कर्मचारियों के सामने तीन विकल्प
पर्यटन निगम कर्मचारियों के सामने तीन विकल्प रखे गए हैं। इसमें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने, नए प्रबंधन द्वारा सेवाएं लेने पर काम करने देने या अन्य विभागों में समायोजित करने के विकल्प रखे गए हैं। निगम के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी इस निजीकरण से प्रभावित होंगे। उन्हें अन्य निगमों में समायोजित करने का प्रस्ताव भी है।
8 बार बढ़ाई मियाद, नहीं आए टेंडर
अपने कार्यकाल के आखिरी दिनों में बसपा सरकार ने ही सितंबर 2011 में पर्यटन इकाइयों के निजीकरण का प्रयास किया था। तब 77 इकाईयों को शामिल किया गया था। सपा सरकार ने 4 साल की सत्ता के बाद 2016 में निजीकरण के प्रयास तेज किए। लीज के लिए सरकार 8 बार टेंडर की मियाद बढ़ा चुकी है।