नगर निगम सदन की बैठक एक घंटे देरी से एक बजे शुरू हुई। पार्षद रवि माथुर ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि सदन की बैठक की सूचना पार्षदों को देरी मिलती है। इसकी वजह से वे प्रस्ताव लगाने से चूक जाते हैं। उन्होंने नगर निगम अधिनियम की धारा दो (क) के तहत विशेष सदन के प्रस्तावों को शामिल करने की मांग की। अन्य पार्षदों ने भी उनका साथ दिया। हंगामा होने पर मेयर इंद्रजीत आर्य ने ठीकरा अधिकारियों के सिर फोड़ने की कोशिश की, मगर नगर आयुक्त ने उल्टे मेयर पर ही देर से सदन बुलाने का आरोप जड़ दिया। मामला बिगड़ते देख मेयर ने कहा कि आगे से सूचना समय पर दी जाएगी।
पार्षद राजपाल यादव ने सड़कों की खुदाई का मामला उठाया। कहा कि सड़क बन जाती है उसके बाद टोरंट पावर खुदाई करने पहुंची है। मरम्मत कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने निगम अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया। पार्षद कुंदनिका शर्मा, प्रदीप अग्रवाल, मुकेश यादव, कर्मवीर सिंह भारती, शिरोमणि सिंह, रफतउल्ला, हेमंत प्रजापति सहित कई पार्षदों ने भी समर्थन किया। जमकर हंगामा हुआ। टोरंट के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया गया और सदन ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर दिया।
अशोक बंसल ने पार्षदों की सुनवाई न होने का मामला उठाया। उमेश यादव भी समर्थन में कूद पड़े। कहा कि पार्षद मुंशी की तरह इधर-उधर से फाइल लेकर घूमता रहता है, लेकिन सुनवाई नहीं होती है। अन्य पार्षदों ने भी सुर मिलाया। मेयर ने रोकने की कोशिश की तो उनको ही निशाना बनाकर कहा, आप विदेश दौरे करिए, भले ही जनता और पार्षद परेशान होते रहें। नगर आयुक्त ने पार्षदों को शांत किया और प्राथमिकता के आधार कार्य करने का भरोसा दिलाया। निगम की सीमा विस्तार के प्र्रस्ताव पर कमेटी का गठन कर दिया गया है। कुछ पार्षदों के विकास कार्यों के प्रस्ताव स्वीकृत कर दिए गए। मनोज राजौरा ने कर्मचारियों की हाजिरी के लिए बायोमैट्रिक्स सिस्टम, शौचालयों के संचालन के लिए कर्मचारी रखने की मांग की, जिसे खारिज कर दिया गया।
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नहीं रखने दिया जलकल का बजट
आगरा। पार्षदों ने सदन की बैठक में जलकल विभाग का बजट नहीं रखने दिया। उनका कहना था कि सामान्य सदन की बैठक में बजट पास नहीं हो सकता है। जमकर बहस हुई लेकिन पार्षद नहीं माने। इसके बाद जलकल विभाग के अधिकारियों ने वाटर टैक्स का टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव को पास कराने कोशिश की, लेकिन पार्षदों ने इनकार दिया। जीएम जलकल विभाग मंजू गुप्ता चाहती थीं कि किसी तरह सदन में चर्चा हो जाए, फिर चाहे पार्षद प्रस्ताव को खारिज कर दें। पार्षद भांप गए कि प्रस्ताव खारिज किया तो अधिकारी इसे शासन से पास करा लेंगे। इसलिए पार्षदों ने कह दिया कि जब जनता को पानी ही नहीं मिलता है तो टैक्स की दर बढ़ाने का औचित्य क्या है।