आगरा। स्टांप बचाने के लिए एक बिल्डर ने छह करोड़ रुपये की कीमत की संपत्ति को तीन करोड़ रुपये दर्शाकर बेच दी। आयकर विभाग की सर्च में मिले समझौता ज्ञापन (एमओयू) में संपत्ति की कीमत छह करोड़ मिली तो जिलाधिकारी ने जांच कराई। जांच में आरोप सही मिलने पर बिल्डर को करीब 37 लाख रुपये जमा कराने के आदेश दिए हैं। रकम जमा न कराने पर कुर्की की कार्रवाई शुरू करने के लिए कहा है।
स्टांप कमी का यह मामला नोएडा निवासी बिल्डर मनीष अग्रवाल की फर्म मेसर्स एनीमेंट इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। फर्म ने आगरा तहसील के माैजा मऊ में 4270 वर्गमीटर क्षेत्रफल की संपत्ति को तीन करोड़ रुपये में खरीदा। इसके लिए सर्किल रेट के अनुसार करीब 31 लाख रुपये बतौर स्टांप जमा कराया। हालांकि बड़े लेनदेन के चलते उप निबंधक कार्यालय ने गोपनीय जांच कराई पता चला कि खरीदी गई इस संपत्ति के अगल-बगल में मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनी हुई थी।
ऐसे में उप निबंधक की गोपनीय जांच में इसकी कीमत और स्टांप ज्यादा होने की रिपोर्ट दी गई। रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने एडीएम वित्त को जांच साैंपी। पता चला कि यह जमीन मनीष ने मेसर्स हेरिटेज जेवीएम बिल्डर के मालिक दयालबाग निवासी सतीश अरोड़ा से खरीदी थी। हालांकि इस बीच अधिकारियों को 2008 में आयकर विभाग की जांच से जुड़ा एक पत्र आयकर अधिकारियों से मिला जिसमें समझौता ज्ञापन मिलने और उसमें इसी संपत्ति की कीमत छह करोड़ रुपये दिखाई गई थी।
लंबी जांच और उसके बाद सभी पक्षों को पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिया गया। बिल्डर का जवाब संतोषजनक न रहने पर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने 29.50 लाख स्टांप और 7.37 लाख रुपये का अर्थदंड लगा दिया। साथ ही 20 जून 2008 से रकम जमा किए जाने की तारीख तक 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज भी अदा करने के आदेश दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि एक महीने में राशि जमा न कराई गई तो वसूली की कार्रवाई शुरू की जाएगी।