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अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले गैंग के सरगना सहित तीन गिरफ्तार

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आगरा। आगरा के साइबर अपराधियों का गैंग अमेरिकी नागरिकों को नौकरी और लोन का झांसा देकर ठगी का शिकार बना रहा था। इसके लिए खंदारी स्थित गुलमोहर वाटिका में कॉल सेंटर खोल रखा था। ऑनलाइन वेबसाइट से लोगों का डाटा लेने के बाद कॉल करके जूम और स्काइप एप के माध्यम से नागरिकों से बात करते थे। कंसल्टेंसी चार्ज के रूप में 20 से 40 डॉलर तक जमा करा लेते थे। जिन लोगों को लोन दिलाने में सफल होते थे, उनसे 0.5 प्रतिशत का कमीशन भी लेते थे। पुलिस ने गैंग के सरगना सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि साइबर अपराधी रोजाना लोगों को तरह-तरह से ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस को सूचना मिली थी कि न्यू आगरा में एक गैंग अमेरिकी नागरिकोें और वहां पढ़ाई कर रहे भारतीय नागरिकों के साथ ठगी कर रहा है। उन्हें पर्सनल-बिजनेस लोन और नौकरी का झांसा देकर डॉलर जमा करा लेते हैं। बड़ी संख्या में लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। इस पर पुलिस ने छानबीन के बाद न्यू आगरा के गुलमोहर वाटिका, खंदारी निवासी गौरव तोमर, जंगजीत नगर (सदर) निवासी आशीष शर्मा और आजमपाड़ा (शाहगंज) निवासी वसीम को गिरफ्तार किया। गौरव मूलरूप से हाथरस के गौसगंज का रहने वाला है। वह गैंग का सरगना है। बीटेक पास है। उसी ने वर्ष 2018 में गुलमोहर वाटिका में इनोवेटिव टेली प्रोसेस नाम से बीपीओ खोला था। इसका लाइसेंस भी नहीं ले रखा था। इसके माध्यम से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सेवाएं प्रदान कर ठगी का शिकार बना रहे थे। आरोपियों ने बड़ी संख्या में लोगों से डालर जमा कराने के बाद न तो नौकरी लगवाई और न ही लोन दिलाया। ऐसे में लोगों ठगी का शिकार हो गए। आरोपी दूसरे देश के होने के कारण शिकायत नहीं मिल पाई हैं। अब पुलिस आरोपियों का खाता चेक करेगी। पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक थाना न्यू आगरा भूपेंद्र सिंह, एसएसआई आलोक दीक्षित, प्रभारी साइबर सेल सुल्तान सिंह, एसआई जितेंद्र कुमार धामा, सुमित नागर, अंकित चौहान, विजय कुमार आदि पुलिस टीम में शामिल रहे।
जूम और स्काइप एप की मदद से करते थे बात
एसपी सिटी के मुताबिक, आरोपी जूम और स्काइप एप के माध्यम से अमेरिका के लोगों को कॉल करते थे। अमेरिकी नागरिक सहित अन्य को यूएस में नौकरी, मर्चेंट कैश एडवांस, बिजनेस लोन की सेवाएं देने का वादा करते थे। यूएस स्टाफिंग के लिए यूएसए में कंपनी का पंजीकरण होना आवश्यक है। मगर, आरोपियों ने पंजीकरण नहीं करा रखा था।
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वेबसाइट से खरीदते थेे डाटा
पुलिस ने बताया कि आरोपी डाइस पोर्टल से लोगों के रिज्यूम और डाटा वर्ल्ड से लोन के लिए आवेदन करने वालों की जानकारी लेते थे। लोगों से कंसल्टेंसी चार्ज के रूप में 20 से 40 डालर तक खातों में डलवाते थे। डाटा उपलब्ध कराने वाली कंपनी को एक व्यक्ति केलिए एक डालर के हिसाब से देते थे।
चेक करते थे क्रेडिट स्कोर
गैंग के सदस्य सबसे पहले आवेदक का क्रेेडिट स्कोर चेक करते थे, जिसका 740 से ऊपर होता था, उससे ही बात करते थे। इसके बाद आय प्रमाण पत्र सहित अन्य कागजी कार्रवाई आनलाइन पूरी करा लेते हैं। जो व्यक्ति लोन लेने योग्य होता है, उसकी फाइल आगे बढ़ा दी जाती है। अगर, किसी का लोन स्वीकृत हो जाता है तो उनसे 0.5 प्रतिशत कमीशन लेते हैं। लोन नहीं होने पर भी 40 डालर तक लेते हैं। मर्चेंट कैश एडवांस में बिजनेस लोन और पर्सनल लोन दिलाने के लिए डॉट लाइसेंस की आवश्यकता होती है। यह भी आरोपियों ने नहीं लिया था।
यह हुई बरामदगी
पुलिस ने आरोपियों से आठ लैपटॉप, 16 मोबाइल, दो हेड फोन, एक कीबोर्ड, एक बायोमेट्रिक मशीन, एक हार्ड डिस्क, एक राउटर, एक स्विच, छह लैपटॉप चार्जर, दो चेकबुक, एक पासबुक, एक पेन कार्ड, एक डीएल, आठ एटीएम कार्ड, एक आधार कार्ड बरामद किया है।
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