आगरा। कमला नगर के दवा कारोबारी रविकांत गुप्ता ने तीन दवा कारोबारियों की धमकियों से परेशान होकर आत्महत्या की थी। रविकांत के 70 लाख रुपये दवा कारोबारियों पर बकाया थे। वह रुपये लौटाने से इनकार कर रहे थे। परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। यह आरोप पत्नी चंचल ने लगाया है।
थाना कमला नगर में दवा कारोबारी योगेश दवाई, बबलू दवाई और दीपक भर्रा के खिलाफ पति को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने और अमानत में खयानत का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज किया गया है। परिवार के करीबियों ने पुलिस को यह भी बताया है कि तीनों आरोपी सट्टा कराते हैं। हालांकि इसकी पुलिस जांच कर रही है।
कमला नगर स्थित फूल वाटिका के रहने वाले रविकांत गुप्ता राजकोट में दवाओं का कारोबार करते थे। मार्च 2020 में लॉकडाउन लगने पर परिवार सहित घर वापस आ गए थे। सोमवार की शाम को रविकांत बल्केश्वर के पार्वती घाट पर बेहोशी की हालत में मिले थे। एक राहगीर की सूचना पर पहुंचे परिजन उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी लेकर पहुंचे। उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
मंगलवार की सुबह परिजन बल्केश्वर घाट पर शव का अंतिम संस्कार कर रहे थे। तभी पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने जलती चिता से शव को उठाया। इसके बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा था रविकांत की पत्नी चंचल कैंसर पीड़ित है। उन्होंने पुलिस को बताया कि पति के पर्स से चार पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ। यह सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था।
दवा कारोबारी की पत्नी चंचल ने थाना कमला नगर में तहरीर दी। इसमें कहा कि सुसाइड नोट में बबलू दवाई वाले पर तकरीबन 39.78 लाख रुपये, योगेश राजेश मेडिकल फुव्वारा पर तकरीबन 19.48 लाख रुपये और दीपक भर्रा पर 10.36 लाख रुपये निकलने की बात कही। इन सबके बारे में पति ने परिजनों को भी बताया था। उन पर लाखों रुपये उधार होने की बात कही थी।
बाद में बबलू दवाई वाले ने चार लाख रुपये और योगेश मेडिकल वाले ने पांच लाख रुपये देकर कागजात पर हस्ताक्षर करा लिए थे। पुलिस ने बबलू, योगेश और दीपक भर्रा को नामजद किया है। थाना कमला नगर के प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र शर्मा ने बताया कि रविकांत को आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का आरोप लगाया गया है। सुसाइड नोट की जांच की जा रही है। तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
रविकांत के मामा संतोष ने बताया कि भांजे को सट्टेबाजों ने अपने जाल में फंसाया था। एक साल पहले उस पर सट्टेबाजों का पैसा निकल रहा था। वह दो करोड़ रुपये हार गया था। यह रकम चुकाने के लिए उसने राजकोट में दुकान, मकान, फ्लैट तक बेच दिए। इसके बाद सभी का पैसा चुकाया था। बाद में वो 70 लाख रुपये जीत गया था। मगर, यह रकम सट्टेबाज उसे नहीं लौटा रहे थे। उसे धमकी दे रहे थे। तगादा करने पर सट्टेबाजों अपने कर्मचारियों पर पैसा होने की कह देते थे। एक बार समझौता कराकर जबरन कागजात पर हस्ताक्षर करा लिए थे।
इसका विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी थी। एक आरोपी का नाम पूर्व में पुलिस की ओर से जारी सट्टेेबाजों की सूची में भी शामिल रहा है। इसके अलावा भी रविकांत के बाजार में रुपये फंसे हुए थे। उधर, थाना प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र शर्मा ने बताया कि आरोपियों के बारे में क्षेत्र में चर्चा है कि वो सट्टा कराते हैं। हालांकि पुलिस के पास उनका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। सट्टे में पकड़े जाते तो मुकदमे में नामजद भी होते। अभी जांच की जा रही है।
पत्नी चंचल ने मुकदमे में लिखा है कि जबरन कागजात पर हस्ताक्षर कराने का विरोध पति ने किया था। इस पर आरोपियों ने पीटकर भगा दिया था। यह भी कहा था कि अब कोई लेना-देना नहीं है। दोबारा पैसे मांगने पर पत्नी और बच्चों को जान से मारने की धमकी दी थी। इस बारे में पति ने घरवालों को बताया था। वह काफी डर गए थे। उन्होंने आत्महत्या कर ली।
मुकदमे में नाम आने के बाद योगेश, बबलू और दीपक भर्रा भूूमिगत हो गए। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश भी दी, लेकिन हाथ नहीं आ सके हैं। थाना प्रभारी का कहना है कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।