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UP: उल्टा लटकाकर पीटा किसान, जांच में सामने आया खौफनाक सच; थानाध्यक्ष और दो अन्य पुलिसकर्मी फंसे

Tue, 20 Jan 2026 08:30 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के किरावली थाने में किसान को पूछताछ के नाम पर बेरहमी से पीटा गया। इस मामले में  निलंबित थानाध्यक्ष और दो अन्य पुलिसकर्मी फंस गए हैं। 
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पुलिस ने किसान के तोड़ दिए पैर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के किरावली थाने में किसान राजू शर्मा की पिटाई के मामले में निलंबित थानाध्यक्ष और दो अन्य पुलिसकर्मी फंस गए हैं। विभागीय जांच में अपर पुलिस आयुक्त राम बदन सिंह ने तीनों को दोषी पाया है। तत्कालीन एसीपी अछनेरा रामप्रवेश गुप्ता को क्लीन चिट दे दी गई है। उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट पुलिस आयुक्त दीपक कुमार को सौंप दी है। अब पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज हो सकती है।
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किरावली के गांव करहरा में 5 अगस्त को सेवानिवृत्त फौजी बलवीर सिंह की हत्या हुई थी। पांच महीने बाद भी हत्याकांड का खुलासा नहीं हो सका है। इसी मामले में 20 दिसंबर को गांव के सत्यप्रकाश को पुलिस ने थाने बुलाया था। पूछताछ के लिए थाने में ही बैठा लिया। बाद में सत्यप्रकाश के छोटे भाई राजू (42) को थाने बुलाया गया। पुलिस ने शक के आधार पर राजू से पूछताछ शुरू की।

आरोप है कि परिजन को घर भेज कर एसआई धर्मवीर और सिपाही रवि राजू को थाने की छत पर ले गए। उन्हें उल्टा लटकाकर पैरों पर डंडे बरसाने शुरू कर दिए। हत्यारोपी का नाम बताने के लिए दबाव बना रहे थे मगर राजू ने जानकारी होने से इन्कार कर दिया। पिटाई से बेहोश होने पर पुलिसकर्मी बिना परिजन को सूचना दिए राजू को अस्पताल ले गए थे। परिजन को दूसरे दिन घटना की जानकारी हुई थी।
 

राजू ने परिजनों को आपबीती बताई। इसके बाद परिजन और रिश्तेदारों ने हंगामा किया था। पिटाई से राजू के दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गया था। जानकारी पर एसीपी अछनेरा राम प्रवेश गुप्ता पहुंचे थे। उन्हें भी पुलिसकर्मियों ने सही जानकारी नहीं दी थी। बाद में डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा पहुंचे। तब थानाध्यक्ष नीरज सिंह, एसआई धर्मवीर और सिपाही रवि को निलंबित किया गया था। एसीपी अछनेरा रामप्रवेश गुप्ता को भी हटा दिया गया था।

पुलिस आयुक्त ने मामले की जांच अपर पुलिस आयुक्त रामबदन सिंह को दी थी। उन्होंने पुलिसकर्मियों और पीड़ित के बयान लिए। पीड़ित ने बयानों में पुलिस पिटाई की बात कही। वहीं मेडिकल रिपोर्ट भी देखी गई जिसमें राजू के दोनों पैरों में फ्रैक्चर हुआ था। इस आधार पर तत्कालीन थानाध्यक्ष सहित तीनों पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया है।

किसान की शिकायत पर नहीं दर्ज हुई प्राथमिकी
पीड़ित किसान ने प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने में तहरीर दी थी। इसमें पुलिसकर्मियों के नाम भी लिखे थे लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी। हालांकि, अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया था। अब जांच रिपोर्ट में पिटाई की पुष्टि होने पर प्राथमिकी दर्ज कराई जा सकती है।

 
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जांच में दोषी मिले पुलिसकर्मी
अपर पुलिस आयुक्त राम बदन सिंह ने बताया कि किसान राजू शर्मा के बयान दर्ज किए गए थे। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर पिटाई के आरोप लगाए। मेडिकल रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि हुई। इस आधार पर तीनों पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया। रिपोर्ट पुलिस आयुक्त को दे दी है। 


 
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