मांग पूरी न होने पर बेटी का उत्पीड़न करते थे। समाज के लोगों ने भी कई बार पंचायत में समझाया लेकिन ससुराल वाले नहीं माने। 10 अप्रैल, 2022 को थाने में शिकायत भी की थी। उस दौरान बेटी के ससुराल वाले राजीनामा कर उसे अपने साथ ले गए। बेटी का मौसेरा देवर शिवम उसकी मदद करता था। ससुराल में होने वाली हर घटना के बारे में उन्हें बताता था। घटना वाले दिन बेटी की ससुराल वालों ने षड्यंत्र कर शिवम को घर बुलाया।
लाठी-डंडे और लोहे के बांके से हमला कर बेटी और शिवम की हत्या कर दी। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया जहां से जेल भेज दिया गया था। विवेचक ने मदन, उसके पुत्र गौरव, अभिषेक और पत्नी नीलम के खिलाफ 23 अगस्त, 2022 को आरोप पत्र दाखिल किया। ननद काव्या और देवर कृष्णा की प्राथमिकी में गलत नामजदगी पाए जाने पर उनके नाम निकाल दिए।
तब तक लटकाएं...जब तक मृत्यु न हो जाए
मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 14 गवाह पेश किए गए। जिसमें चश्मदीद गवाह मृतक शिवम के भाई अभिषेक की गवाही और घटना का सीसीटीवी फुटेज सजा दिलाने में अहम रहा। अदालत ने गाैरव, अभिषेक और मदन को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि दोषियों को तब तक गर्दन में फांसी लगाकर लटकाया जाए, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। तीनों दोषियों को कोर्ट से जेल भेज दिया गया।
कब-क्या हुआ
- 27 मई, 2022 को महिला और उसके मौसेरे देवर की हत्या हुई।
- 27 मई, 2022 की रात प्राथमिकी दर्ज हुई।
- 1 जून, 2022 को आयुध अधिनियम की धारा में आरोपपत्र दाखिल हुआ।
- 23 अगस्त, 2022 को हत्या के आरोप में आरोपपत्र दाखिल हुआ।
- 17 अप्रैल, 2023 को मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ।
- 15 जून, 2023 को पत्रावली साक्ष्य में चली गई।
- 11 फरवरी, 2026 को दोषियों के बयान हुए
- 1 अप्रैल, 2026 को सजा सुनाई गई।
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