पोस्टमार्टम हाउस पर मृतकों के परिजनों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
पोस्टमार्टम करने वाले स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों ने काबिलेतारीफ काम किया। एक दिन में लगातार 11 घंटे तक 43 शवों को पोस्टमार्टम किया। देर रात तक सभी की रिपोर्ट तैयार करने के बाद ही डॉक्टर पोस्टमार्टम गृह से गए।
सीएमओ और एसीएमओ भी यहीं डटे रहे। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बाह में भी दो शव का पोस्टमार्टम किया गया। तूफान में मारे गए लोगों के शवों को लेकर परिजन सुबह तड़के से ही पोस्टमार्टम गृह पहुंचने लगे थे।
कोई निजी वाहन तो कोई एंबुलेंस से शव लेकर आया। भारी जनहानि को देखते हुए पोस्टमार्टम गृह पर तीन डॉक्टर और दो फार्मेसिस्ट की ड्यूटी लगाई गई। सुबह नौ बजे से ही शवों के पोस्टमार्टम करना शुरू कर दिए गए थे।
पोस्टमार्टम हाउस
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एक के बाद एक शव आने लगे। हालत ऐसी कि शवों को पोस्टमार्टम गृह में रखने तक की जगह नहीं थी। तीन मेजों पर डॉक्टर शव को पोस्टमार्टम करने में लगे हुए थे।
फार्मेसिस्ट साथ ही साथ रिपोर्ट बनाते जा रहे थे। शाम सात बजे आखिरी शव का पोस्टमार्टम हुआ। सीएमओ और एसीएमओ भी पोस्टमार्टम गृह पर मुस्तैद रहे।
सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स ने बताया कि तूफान को देखते हुए जनहानि की आशंका थी। रात में ही तीन डाक्टरों समेत पांच की पोस्टमार्टम करने के लिए ड्यूटी लगा दी थी। 43 शवों के पोस्टमार्टम किए गए हैं।
अधिकांश की सिर में चोट लगने से हुई मौत
43 शवों के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में अधिकांश की मौत की वजह सिर में चोट लगना बताया जा रहा है। ये चोट किसी भारी वस्तु के गिरने की वजह से आई हैं। कुछ मौत छाती पर वजनदार वस्तु गिरने से आई चोट के कारण हुई हैं।
पोस्टमार्टम गृह पर एक के बाद एक शव पहुंच रहे थे। सभी अपने परिजनों के पोस्टमार्टम जल्द कराना चाह रहे थे। ऐसे में जल्द पोस्टमार्टम के लिए नेताओं के जरिये सिफारिश भी लगवाई।