राजकीय बाल गृह (शिशु) के अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि तीनों बच्चे प्री मैच्योर थे, अचानक मौसम बदला तो ठंड से उनकी तबीयत खराब हो गई। उस दिन मैं मौजूद नहीं था, इसलिए दूसरे कर्मचारी ने निरीक्षण समिति को लेक्टोजन पाउडर व खरीद रजिस्टर नहीं दिखाया।
अमर उजाला पड़ताल में सामने आई हकीकत
राजकीय बाल गृह (शिशु) में शनिवार को अमर उजाला टीम ने पड़ताल की तो हैरान करने वाली हकीकत सामने आई। बालगृह में 44 बच्चों की देखरेख के लिए तीन शिफ्ट में छह आया संविदा पर काम करती हैं।
यानी एक शिफ्ट में दो आया 44 बच्चों को संभालती हैं। इन 44 बच्चों में 12 बच्चे 0 से 5 साल उम्र के हैं। इनमें 5 लड़कियां हैं और 7 लड़के हैं। 5 से 10 साल उम्र के यहां 32 बच्चे हैं। 4 कमरों में चल रहे शिशु गृह में सिंगल बेड पर दो से तीन बच्चे रहते हैं।
शिशु गृह में तीन बच्चे अभी बीमार हैं। इनका संस्था में ही उपचार चल रहा है। यहां सप्ताह में एक दिन चिकित्सक देखने आते हैं। चिकित्सक का रोस्टर के अनुसार स्वास्थ्य परीक्षण दिवस निर्धारित है। शिशु गृह में कुल 12 कर्मचारी हैं।